पांच बत्ती स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में रविवार को आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया गया। इसमें संत फूलचंद बजाज ने श्रृद्धालुओं से कहा कि हृदय में निरंकार बसा हो और अंग-संग इस प्रभु का अहसास हो तो इंसान कभी बुराई के रास्ते पर नहीं जाता।
इंसानियत, प्रेम, मानवता फैलाने का माध्यम बनता है। भौतिक प्रगति के साथ-साथ आध्यात्मिक विकास भी इंसान के लिए अतिआवश्यक है। जिससे इंसान स्वयं का भी भला करें और संसार के भले में भी अपना योगदान दें। सत्संग में सीताराम निरंकारी, संतोष कुमार, रविन्द्र, नवल, अजय, जसवंत, सत्यनारायण, प्रियांशु, हाथोज से आये मूलचंद, कविता, अनूप, सिमरन, मेघा मौजूद थे।
आर्य समाज मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ देव यज्ञ का आयोजन हुआ। इसमें महर्षि दयानंद सरस्वती का ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश का पठन भी किया गया। मंत्री जगदीश चंद कसेरा ने कहा कि परमात्मा ने किसी को ऊंचा-नीचा, अछूत या दलित नहीं बनाया। ये जाति भेद अज्ञानतावश मनुष्यों की ही देन है। हमारी वैदिक सनातन संस्कृति मनुष्य बनने का संदेश देती है। पहले स्वयं मनुष्य बनों और दूसरों को भी मनुष्य बनाओ। इस मौके पर मनीष आर्य, दिनेश कुमार आर्य सहित कई श्रद्धालु मौजूद थे।