जिलेभर में माहे रमजान के रोजे रखे जा रहे हैं। इसमें बुजुर्ग, बच्चें एवं महिलाएं भी पीछे नहीं है। इसबार भीषण गर्मी में 15 घंटे से अधिक का रोजा रखा जा रहा है। पहले रोजे का समय के अनुसार करीब 15 घंटे 14 मिनट का रोजा था। दूसरे रोजे के बाद सहरी एवं इफ्तार के समय में इजाफा हो रहा है। पहले रोजे की सहरी अल सुबह 3: 56 मिनट तक थी तथा रोजा इफ्तार 7:10 मिनट था, जिसमें तीसरे रोजे तक तीन मिनट का इजाफा हुआ है। अब समय एक-दो दिन में निरंतर बढ रहा है। आखिरी रोजा15 जून 2018 को खत्म सहरी 3:48 मिनट तक होगी तथा रोजा इफ्तार 7 : 22 मिनट तक होगा। जून में तापमान बढने के साथ ही रोजे का समय भी बढेगा। इस संबंध में रोजेदारों का कहना है कि समय एवं गर्मी कितनी भी बढे रोजे में तक़वा मजबूत होता है, तो किसी भी चीज का पता नहीं चलता है। सभी कार्य करते हुए भी रोज़ेदार पूरे रोजे रख रहे हैं। इस्लमी जानकारों ने बताया कि िकसी रोजेदार को रोजा इफ्तार कराए तो उसको जहन्नुम से निजात मिल जाएगी। रोजा इस्लाम के पांच अरकान में से एक रुकन है। हर मुसलमान आकिल, बालिग मर्द - औरत पर इस महीने के रोजे फर्ज है। बगैर उज्र शरई के अगर रमजान का कोई एक रोजा भी छोड दे तो पूरी जिंदगी उसकी कजा करता रहे तो वह सवाब हासिल नहीं हो सकता है, जो रमजान में एक रोजे का है। रोजे के जरिए इंसान के अंदर तकवा, अल्लाह का डर पैदा होता है।