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फोटोग्राफी के माध्यम से ग्रामीण परिवेश को उभार कर दिया रचनात्मक संदेश

3 वर्ष पहले
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टोंक| फोटोग्राफी भी ऐसी कला है, जो सदियों की यादें एवं हालातों का सटीक बयानी कर देती है। लेकिन ये क्लिक दबाने से ही नहीं बल्कि उसके लिए मन मस्तिष्क के पटल पर भी एक सोच एवं एक एंगल को उभारा जाता है। उसके बाद फोटोग्राफी जीवंत हो उठती है, जिसपर एक पूरी कहानी, इतिहास एवं कई रचनाएं की जा सकती है। कुछ इसी प्रकार की अभिव्यक्ति अजीम प्रेमजी फाउंडेशन में चल रही बियोंड द फ्रेम प्रर्दशनी के समापन अवसर पर सामने आई। उल्लेखनीय है कि अजीम प्रेमजी फाउंडेशन हाल में बयोंड द फ्रेम, चौखटों के पार फोटो प्रदर्शनी में प्रारंभिक कक्षा के बच्चों द्वारा खींची गई तस्वीरों और उनके अनुभवों को साझा किया गया। इसके समापन अवसर पर डा. मनु शर्मा ने कहा कि फोटोग्राफ की गहनता को देखते हुए जो स्थितियां सामने आई वो सराहनीय रही। ग्रामीण परिवेश की फोटोग्राफी एवं उनके भाव आदि की सराहना करते हुए इसे रचनात्मक दिशा में एक अच्छा कदम बताया। मीडिया से जुड़े मनोज तिवाड़ी ने फोटोग्राफी के बारे में कई जानकारी देते हुए बेहतर फोटोग्राफी के लिए कई उदाहरण देकर भी समझाया।

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