झीलों में गंदगी, अतिक्रमण के लिए कलेक्टर जिम्मेदार : हाइकोर्ट
उदयपुर | गुलाब बाग की कमल तलाई में पक्का निर्माण रोककर जल आवक के प्राकृतिक भूमिगत स्रोतों को जीवित रखने और इस तलाई से चंपा बाग तक बनी नहर पुनर्जीवित करने की जनहित याचिका के निस्तारण के लिए हाईकोर्ट ने उदयपुर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित कमेटी से शिकायत करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ झीलों की सफाई की जिम्मेदारी कलेक्टर को दी। इस कमेटी के अध्यक्ष कलेक्टर हैं। उदयपुर के विश्व ब्राह्मण संगठन, दीनदयाल वाहिनी आैर शहर जिला कांग्रेस कमेटी की आेर से जनहित याचिका लोकेश मेनारिया व आशीष सोमानी ने दाखिल कराई थी। कमेटी में यूआईटी सचिव, नगर निगम आयुक्त, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के रीजनल ऑफिसर, जल संसाधन विभाग के रिटायर्ड एसई जी.पी. सोनी, एडवोकेट प्रवीण खंडेलवाल और एडवोकेट संजीत पुरोहित सदस्य हैं। झीलों में गिरने वाली गंदगी की नियमित सफाई और सीवरेज मुक्त रखने के प्रति यह कमेटी जिम्मेदार होगी।
कमल तलाई से चलने वाली भूमिगत नाड़ियां जाम
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से गुजारिश की कि कमल तलाई को पक्का करने का काम नगर निगम ने शुरू कर दिया है, जो सदियों पुराना प्राकृतिक जल भंडारण है। इसमें दाे भूमिगत प्राकृतिक जल मार्गों से पानी की आवक होती है। एक वेन दूधतलाई से और दूसरी वेन पीछोला की बड़ी पाल से समोर बाग होकर कमल तलाई में आती है। कमल तलाई से चलने वाली भूमिगत नाड़ियों से गुलाब बाग और आसपास की 20 बावड़ियाें में पानी आता है। विशाल उद्यान में लगे पेड़-पौधों को पानी इन्हीं प्राकृतिक स्रोतों से मिलता है। याचिका में आरोप लगाया गया कि कमल तलाई से सुभाषनगर स्थित चंपा बाग तक प्राचीन नहर जाती थी, जिसका प्रवाह मार्ग प्रशासन की अनदेखी से अतिक्रमियों ने अवरुद्ध कर दिया। नहर की जल निकासी खुलवाने और इस पर हो रहे कृष्ण लीला पैलेस होटल का कब्जा मुक्त कराने की मांग की गई।