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जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर लघु एवं सीमान्त किसानों पर : डाॅ. गोले

3 वर्ष पहले
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उदयपुर | जलवायु परिवर्तन से जहां सभी जीव प्रभावित हैं, वहीं इसका सबसे ज्यादा प्रभाव कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में छोटे और सीमांत काश्तकारों पर हो रहा है। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की ही जिम्मेदारी नहीं, बल्कि खुद स्वयं सेवी संस्थाओं और आम जन समुदाय को इस दिशा में संयुक्त प्रयास करना चाहिए।

यह बात नाबार्ड मुख्यालय के मुख्य महाप्रबंधक डाॅ. पीएम गोले ने शिल्प ग्राम के पास होटल में नाबार्ड, राजस्थान के जलवायु परिवर्तन संबंधित परियोजना की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में कही। उन्होंने नाबार्ड और गायत्री सेवा संस्थान के संयुक्त प्रयास से सराड़ा पंचायत समिति में बने मॉडल ग्राम मांडली की सराहना की। नाबार्ड मुख्यालय के उप महा प्रबन्धक महादेवियन ने जलग्रहण कार्यक्रमों के लिए स्वयं सेवी संस्थाओंं को आगे आने का आह्वान किया। बैठक में गुजरात और राजस्थान की 20 से ज्यादा स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि, नाबार्ड के अधिकारियों समेत जलग्रहण परियोजनाओं से संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। गायत्री सेवा संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी चेतन पांडे ने मांडली में किए प्रयासों और समुदाय के साथ समन्वय संबंधी जानकारियां दीं।

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