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परिवर्तन नाटक में कलाकारों ने समाज को दिखाया अच्छाइयों और बुराइयों का आइना

3 वर्ष पहले
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उदयपुर | राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद के संचालित राणा पूंजा महाविद्यालय जनजाति छात्रावास का वार्षिकोत्सव शनिवार को टाउनहॉल स्थित रंगमंच पर हुआ। इसमें छात्रावास एवं वनवासी कल्याण परिषद की नगर समिति के सदस्यों ने नाटक परिवर्तन का मंचन कर ग्रामीण परिवेश की यथार्थ स्थिति को दर्शाया। परिषद के गोपाल कुमावत ने बताया कि नाटक में दिखाया गया कि आज भी कुछ ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति काफी दयनीय है। गांवों में प|ी मजदूरी करती है और पति शराब में उसकी मजदूरी के पैसे उड़ा देता है। बालिका शिक्षा में सुधार नहीं हो रहा है। एक पिता कर्जे के बोझ तले इतना दबा है कि वह अपने बेटे को दसवीं की परीक्षा का फॅार्म नहीं भरा सकता है। हिंदी और मेवाड़ी भाषा में इस नाटिका में मार्मिक चित्रण किया गया। नाटिका के दूसरे भाग में गांव के ही वनवासी छात्रावास में पढ़ा लिखा बालक रामशंकर गांव के लोगों की मदद कर गांव में परिवर्तन की लहर ला रहा है और इससे गांव का आर्थिक एवं सामजिक विकास हो रहा है। रामशंकर ने गांव के ही बच्चों को इतना पढ़ाया लिखाया कि यहां के बच्चे चिकित्सक, इंजीनियर, शिक्षक बनकर गांव के विकास में भागीदारी निभा रहे हैं। नाटिका में बालक से लेकर वृद्ध महिला तक ने अपने पात्र के साथ पूरा न्याय किया। हॉल में मौजूद लोगों ने तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया। नाटिका के निर्देशक दीपक दीक्षित, लेखिका राधिका थी। सूत्रधार की भूमिका राजेश शर्मा ने निभाई। इसके अलावा नाटिका में संजय कोठारी, विपिन लोढ़ा, अशोक जैन, कैलाश मेनारिया आदि ने भाग लिया। मुख्य अतिथि डूंगरपुर नगर परिषद के सभापति केके गुप्ता और विशिष्ट अतिथि सीएस राठौड़ थे। अध्यक्षता डॉ. एसएल बामणिया ने की। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री भगवान सहाय, परिषद के प्रदेश संगठन मंत्री राजाराम, सुंदर कटारिया आदि मौजूद थे।

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