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अपनी गलतियों के लिए दूसरों को जिम्मेदार न ठहराएं, जिम्मेदार बनें

3 वर्ष पहले
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उदयपुर | एक ही कॉलेज में एक ही टीचर से सैकड़ों छात्र पढ़ते हैं। कोई मेरिट में आता है, लेकिन कोई कामयाब नहीं होता। नाकामी पर टीचर या पेपर को दोष देेते हैं। इसे कहते हैं दीवारों को धक्का मारना। दीवारों को धक्का नहीं मारें, बल्कि खुद को समझने का प्रयास करें। नकारात्मकता छोड़ें, जीवन में हमेशा सकारात्मकता आएगी। ये बात अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर हिमेश मदान ने कही। वे शनिवार को फेडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज (फोर्टी) उदयपुर की मोटिवेशनल सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। हिमेश ने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती, फिर भी 5 से 12 वर्ष की उम्र सबसे सही होती है। तब दिमाग खाली होता है। उसमें जो डाला जाए, वह जिंदगी भर रहता है। अपनी गलतियों के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराना छोड़ें। खुद को मैनेज करें, जिम्मेदार बनें। सचिन तेंदुलकर का उदाहरण देते हुए मदान ने कहा कि उस समय की बेस्ट क्रिकेट एकेडमी ने सचिन को रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन लक्ष्य तय करने के साथ प्रण कर चुके सचिन को आज दुनिया याद करती है। मदान ने कहा, आजकल सभी जगह नेगेटिव लोग मिलते हैं। प्रोत्साहित करने वाले कम ही मिलते हैं, जो हमेशा हतोत्साहित करते हैं। फोर्टी जयपुर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अरुण अग्रवाल ने भी संबोधित किया। फोर्टी उदयपुर के संभागीय अध्यक्ष प्रवीण सुथार ,महेश काला, अनिल नाहर, प्रशांत अग्रवाल, अशोक अजमेरा ,उपाध्यक्ष लोकेश त्रिवेदी, सेमिनार संयोजक विशाल दाधीच, शरद आचार्य आदि मौजूद थे।

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