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समय : गुलाबबाग में सुबह 5 बजे से रात को 8 बजे तक भ्रमण कर सकते है। बच्चों की ट्रेन का शुल्क 30 रुपए है।

3 वर्ष पहले
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गुलाबबाग का निर्माण 1881 में महाराणा सज्जनसिंह ने किया। यह लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में फैला है। महाराणा ने यहां उद्यान बनाने के लिए उधान विशेषज्ञ थोमसनएच. स्टोरी को नियुक्ति किया जिन्होंने सैकड़ों पौधों की प्रजातियां लगाई। महाराणा सज्जन सिंह के काल में स्टोरी ने गुलाबबाग में नवलखा महल बनाया। फिर महाराणा फतेहसिंह ने गुलाब बाडी का निर्माण करवाया। गुलाब बाडी में विभिन्न प्रजातियों के रंग-बिरंगे गुलाब हैं। बाग में ही सरस्वती पुस्तकालय भवन है। महाराणा सज्जन सिंह के बुलावे पर महर्षि दयानंद सरस्वती 10 अगस्त 1882 को उदयपुर आए और 27 फरवरी 1883 तय यहां प्रवास किया और युग प्रवर्तक ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश नवलखा महल में लिखा। जब राजे-रजवाड़ों की संपत्तियां सरकारी कब्जे में चली गईं तो गुलाबबाग के साथ नवलखा महल भी सरकार के अधीन हो गया। नवलखा महल को आबकारी विभाग और सेल्स टैक्स के कार्यालय में तब्दील कर दिया गया। सत्यार्थ प्रकाश की रचना के 100 वर्ष पूरे होने पर 1982 में यहां सत्यार्थ प्रकाश सम्मेलन हुआ। 1992 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत ने नवलखा महल को पुन: सत्यार्थ प्रकाश न्यास को सौंप दिया।


समय : गुलाबबाग में सुबह 5 बजे से रात को 8 बजे तक भ्रमण कर सकते है। बच्चों की ट्रेन का शुल्क 30 रुपए है।

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