बदनाम रातों का गुमनाम चिराग हूं...
उदयपुर | उदयपुर स्थापना दिवस समारोह पर शनिवार रात को नगर निगम सभागार में कवि सम्मेलन हुआ। महिला कवयित्री ने देश में बेटियों के उत्पीड़न पर चिंता व्यक्त करते हुए बेटी बचाओ का संदेश दिया। गीतकार पं. नराेत्तम व्यास ने ढलानों पर सीधे खड़े मेरे पेड़ों नमस्कार से मुशायरे की शुरुआत की। हास्य कवि दाड़म चंद ने पी पी के बोतल फतहसागर में मत नाख्यो... कविता पढ़कर मेवाड़ी भाषा में झील संरक्षण और पुष्कर गुप्तेश्वर ने हरिया हरियालो उदयपुर आपणो प्रस्तुत कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। गीतकार घनश्याम दरक ने भारत दर्शन पर गीत सुनाया। शायर इकबाल हुसैन ने जोश मुझमे मेरी माटी का है, कवियित्री मधु अग्रवाल ने लहू की बूंद कविता प्रस्तुत की। उमर फारुख ने बदनाम रातों का गुमनाम चिराग हूं, बाल कवियित्री युगवी पालीवाल ने दिल एक ऐसा किस्सा कविता प्रस्तुत कर तालियां बटोरीं। कवि कैलाश सोनी ने कविता से बेटी बचाओ का संदेश दिया। मुशायरे में कवि ब्रजराज सिंह जगावत, कवियित्री आशा पांडेय ओझा, शायर बिलाल पठान वास्को डि गामा, सुल्तान भारती, कवियित्री डॉ. चन्द्रकांता बंसल, अनीता भाणावत, डॉ. ममता जोशी, शायर अकबर खान, कवि सागरमल ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को बांधे रखा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. इंदु शेखर तत्पुरुष, साहित्य अनुरागी के. शब्बीर मुस्तफा ने भी कविता पेश की।