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दो ट्रांसफर स्टेशन, एक बायो-मिथेन प्लांट लगेगा, 50 नए टिप्पर चलेंगे

3 वर्ष पहले
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नगर निगम उदयपुर ने शहर में कचरे के निस्तारण, मैकेनाइज्ड सफाई, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और लोगों को गंदगी न करने से रोकने के लिए खास योजना बनाई है। शहर में जल्द ही व्यवस्थित ढंग से कचरा निस्तारण और सफाई की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। बता दें कि झीलों के शहर उदयपुर को साफ-सुथरा और स्वच्छ बनाने के लिए दैनिक भास्कर ने इंदौर और डूंगरपुर जाकर वहां की सफाई व्यवस्था से रूबरू करा उदयपुर प्रशासन को आइना दिखाया था। जिसके बाद नगर निगम आयुक्त सिद्धार्थ सिहाग इंदौर गए और वहां जाकर इंदौर में सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। इंदौर से लौटकर सिहाग ने उदयपुर के लिए 10 प्वाइंट्स का विशेष प्लान तैयार किया है। निगम अगले एक सप्ताह में ये 10 टेंडर कर देगा। शहर को साफ-सुथरा बनाने में निगम की यह योजना कारगर साबित हो सकती है।

डम्पिंग साइट की होगी कैपिंग : तीतरड़ी डम्पिंग साइट पर बने डम्पयार्ड की कैपिंग होगी, उसे पूरा ढककर, काइन हाउस की गायों के लिए गार्डन विकसित किया जाएगा, ताकि वे खुले में विचरण कर सकें।

कचरा बीनने वालों से कराएंगे सूखे कचरे का निस्तारण : निगम सूखे कचरे में से प्लास्टिक, कांच, धातु सहित अन्य उपयोगी चीजें अलग करने के लिए कचरा बीनने वालों का उपयोग करेगा। वे बलीचा या तीतरड़ी में डम्पिंग साइट पर जाकर कचरे का सेग्रिगेशन करेंगे। यह टेंडर 1 करोड़ का होगा।

738 स्थायी सफाईकर्मियों की भर्ती होगी

सरकार ने निगम में 738 नए सफाईकर्मियों की भर्ती की मंजूरी दे दी है। इससे शहर की सफाई व्यवस्था कायम रखने में मदद मिलेगी। अभी उदयपुर में लगभग 1000 स्थाई सफाईकर्मी हैं, 738 और आने से मजबूती मिलेगी।

इन 10 बदलावों से शहर होगा साफ और खास

दो जगह ट्रांसफर स्टेशन बनेंगे

शहर में दो अलग-अलग जगह ट्रांसफर स्टेशन बनाए जाएंगे, ताकि शहर के आॅटो टिप्पर अपना कचरा लाकर ट्रांसफर स्टेशन में डाल सके। इससे एक टिप्पर ज्यादा चक्कर काट सकेगा। यहां से कचरा डम्पिंग यार्ड में चला जाएगा। इसकी लागत 2.3 करोड़ होगी। इसकी कचरा निस्तारण की क्षमता 15 टन प्रतिदिन रहेगी।



बायो-मिथेन प्लांट स्थापित होगा

मैकेनिकल स्वीपिंग मशीन

मैकेनिकल स्वीपिंग मशीन इंदौर की तर्ज पर लाई जाएगी। 7.5 लाख रुपए प्रतिमाह किराए पर मिलने वाली इस मशीन से शहर की सफाई होगी। यह कचरा साफ करने के बाद पानी से सड़क को धोएगी।



कम दरों पर बांटे जाएंगे 1 लाख डस्टबिन

पार्कों में कम्पोस्टिंग करेंगे

पार्काें में कम्पोस्टिंग होगी ताकि वहां पैदा होने वाले कचरे का निस्तारण वहीं किया जा सके। शुरुआत 70 पार्क से । इस पर खर्च 75 लाख होगा। 50 छाेटे गार्डन में 2-2 छोटे पिट व 20 बड़े गार्डन में 4-4 पिट गुलाबबाग में सेमी-ऑटोमेटिक कम्पोस्टिंग सिस्टम लगाया जाएगा।



वार्ड 21 से 30 की व्यवस्था अलग

शहर में बायो मिथेन प्लांट स्थापित किया जाएगा। शहर का जितना भी गीला कचरा या सब्जियां होंगी, उनका निस्तारण इस बायो-मिथेन प्लांट में होगा। इससे गैस उत्पादन कर काम में ली जाएगी।

शहरभर में कम दरों पर डस्टबिन बांटे जाएंगे। फिलहाल 7 हजार घरों में डस्टबिन बांटे गए हैं। निगम कम दरों पर 50 से 70 रुपए तक में 1 लाख डस्टबिन बांटेगा।

कचरा संग्रहण की व्यवस्था बदलेगी। शुरुआत में वार्ड 21 से 30 में टिप्पर के साथ एनजीओ के हेल्पर भी चलेंगे।

1000 पर एक टिप्पर

निगम जल्द ही 50 नए टिप्पर खरीदेगा। फिलहाल जो 45टिप्पर हैं उनसे वार्ड की हर गली से कचरा नहीं उठ पाता है। 50 नए टिप्पर 3.3 क्यूबिक मीटर क्षमता के खरीदे जाएंगे। इसके बाद शहर में हर 1000 घर पर एक टिप्पर उपलब्ध होगा। एक टिप्पर की कीमत 6-7 लाख रुपए होगी।

घर में ही ऑन साइट कम्पोस्टिंग

शहर के 5 वार्डों को चुन वहां लोगों को अपने घरों में ही ऑन साइट कम्पोस्टिंग की शुरूआत कराई जाएगी, लोगों को जागरूक किया जाएगा ताकि वे अपने कचरे का निस्तारण कर उसका सही इस्तेमाल कर सकें।

कैपेसिटी बिल्डिंग

प्रतिष्ठानों, होटल मालिकों, व्यापारियों को जागरूक किया जाएगा। अब होर्डिंग बैनर के नए ठेके नहीं दिए जाएंगे। इन सभी साइट पर स्वच्छता के संदेश और होर्डिंग लगेंगे। प्राइवेट-सरकारी स्कूल के बच्चों को जागरूक किया जाएगा। 8 स्वच्छता एम्बेसडर बनाए जाएंगे।

एनजीओ/सेग्रिगेशन अवेयरनेस

एनजीओ सदस्य हर घर में जाकर गीला-सूखा कचरा कचरा अलग करवाकर टिप्पर में डालेगा। उसे एक घर से 11 रुपए दिए जाएंगे।

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