आईएएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में मेहनत के साथ एग्जाम फिलोसफी पर फोकस जरूरी
उदयपुर | कलेक्टर बिष्णुचरण मल्लिक के मुताबिक दिन-रात सैकड़ों किताबें पढ़ना ही सफलता की गांरटी नहीं है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) जैसी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाएं देने वालों के लिए सक्सेस की अहम कुंजी परिश्रम है, लेकिन जल्द सफलता के लिए परीक्षा की फिलोसफी को बारीकी से समझना भी बेहद जरूरी है।
कलेक्टर मल्लिक शक्तिनगर स्थित झूलेलाल भवन में रविवार को आईएएस पाठ्यक्रम कार्यशाला (भारतीय प्रशासनिक सेवा सिन्धी विषय/भाषा के माध्यम से) को संबोधित कर रहे थे। राजस्थान सिन्धी अकादमी, राष्ट्रीय सिन्धी भाषा विकास परिषद और पूज्य सिन्धी साहिती पंचायत के साझे में हुई वर्कशॉप में नगर निगम आयुक्त सिद्धार्थ सिहाग ने कहा कि परीक्षा की तैयारी शुरू करते वक्त सही किताबों का चयन करना चाहिए। कई अहम किताबों को पढ़ने से पहले बेसिक कॉन्सेप्ट क्लियर कर लेने चाहिए। भारतीय सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में कैंडिडेट्स को इकोलॉजी, इन्वायर्नमेंट, आर्ट और कल्चर पर फोकस करना चाहिए। आईजी रेलवे राजाराम भागवानी ने कहा कि समाज के होनहार छात्रों को प्रशासनिक सेवा व अन्य सरकारी ओहदों पर काबिज होने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
प्रोत्साहन राशि में तीन गुना इजाफा
अकादमी अध्यक्ष हरीश राजानी ने कहा कि सिन्धी भाषी प्रतियोगियों को प्रोत्साहित करने के मकसद से राष्ट्रीय सिन्धी भाषा विकास परिषद के सौजन्य से कार्यशाला की है। राजस्थान सिंधी अकादमी ने सिन्धी विषय में अच्छे अंक पाने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि (छात्रवृत्ति) में तीन गुना से अधिक इजाफा किया है ताकि छात्र यह विषय लेकर आईएएस और आरएएस की तैयारी कर सकें। वाणिज्यिक कर विभाग की उपायुक्त (प्रशासन) प्रज्ञा केवलरमानी ने कार्यशाला को परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए मददगार बताया। परिषद निदेशक डाॅ. रवि प्रकाश टेकचंदानी, ज्ञानेन्द्र ज्ञानी, भावना मोरयानी, साहिती पंचायत के आर.सी. चोटरानी, रमेश दतवानी, मनोहर खूबचंदानी, अकादमी सचिव ईश्वर मोरवानी आदि मौजूद थे।