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गणगौर घाट : कांच की कारीगिरी से सुसज्जित है महल

3 वर्ष पहले
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पीछोला झील के किनारे गणगौर घाट का निर्माण महाराणा नाथ सिंह के वारिस महाराणा भीम सिंह ने करवाया। महाराणा शक्तिसिंह ने सन् 1878 में गणगौर घाट के त्रिपोलिया (नक्काशीदार तीन दरवाजे) पर कांच की कारीगिरी से सुसज्जित महल का बनाया।

मौजूदा स्थिति : उदयपुर के प्रसिद्ध गणगौर घाट पर अनेक त्यौहार और उत्सव मनाए जाते हैं। गणगौर पर्व पर ईशरजी और गणगौर की सवारियां निकाली जाती हैं। मेले में देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। पर्यटन विभाग तीन दिन तक विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम कराता है। जलझूलनी एकादशी पर रामरेवाडियां निकलती हैं, जो गणगौर घाट पहुंचती हैं। झीलों मे मूर्ति विसर्जन पर रोक है। हिंदू नव वर्ष की पूर्व संध्या पर दी गणगौर घाट पर महाआरती की जाती है। घाट पर देशी और विदेशी फिल्मों की काफी शूटिंग हो चुकी हैं। आजकल प्री वेडिंग शूट भी गणगौर घाट पर किया जा रहा है। गणगौर घाट नो व्हीकल जोन में आता है जिसके कारण देशी व विदेशी पर्यटक ई रिक्शा या पैदल चलकर ही गणगौर घाट तक पहुंच सकते हैं। गणगौर घाट पर्यटकों के लिए 24 घंटे खुला रहता है।

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