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पहले दोनों बांध बनाकर टनल से जोड़ेंगे, बाद में तय करेंगे कि पानी उदयपुर को देंगे या राजसमंद जाएगा

3 वर्ष पहले
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देवास प्रोजेक्ट के तीसरे और चौथे चरण को लेकर लंबे समय से चल रही एक उलझन खत्म हो गई है। प्रस्तावित दोनों बांध बनाकर उन्हें 4.3 किलोमीटर लंबी टनल से जोड़ने का काम पहले होगा। यह बाद में तय करेंगे कि पानी उदयपुर आएगा या राजसमंद जाएगा। जल संसाधन विभाग ने 696.37 करोड़ का एस्टीमेट जलदाय विभाग को भेज दिया है।

एस्टीमेट के अनुसार देवास परियोजना के तीसरे चरण मेंं गोगुंदा तहसील में नाथियाथल गांव के पास वाकल की सहायक नदी पर 703 एमसीएफटी भराव क्षमता का बांध बनेगा। इसका कैचमेंट 79.06 वर्ग किलोमीटर हैं। चौथे चरण के तहत गोगुंदा क्षेत्र में ही अंबावा गांव के पास वाकल नदी पर 390 एमसीएफटी भराव क्षमता का बांध बनेगा। इसका कैचमेंट एरिया 92.11 वर्ग किलोमीटर है। दोनों बांध बनने के बाद इन्हें 4.3 किमी लंबी टनल बनाकर आपस में जाेड़ा जाएगा, जो 5.5 डाया मीटर की होगी। काम जल संसाधन विभाग करेगा, लेकिन प्रोजेक्ट पेयजल से जुड़ा होने के कारण मंजूरी के लिए एस्टीमेट जलदाय विभाग को भेजा गया है। मंजूरी के बाद फॉरेस्ट क्लीयरेंस का काम सबसे पहले होगा। मौजूदा कवायद के अनुसार दोनों बांध आैर टनल बनने के बाद यह तय होगा कि देवास 3-4 का पानी राजसमंद ले जाया जाएगा या फिर आकोदड़ा बांध की 11.5 लंबी टनल के रास्ते उदयपुर की झीलों में आएगा।

दोनों बांध के लिए 283 हैक्टेयर जमीन अवाप्त होगी, देवास-2 से ज्यादा मिलेगा पानी

देवास-3 प्रोजेक्ट में बनने वाले बांध के लिए 186.57 हैक्टेयर जमीन अवाप्त होगी। इसमें 75.52 हैक्टेयर निजी, 4.62 हैक्टेयर सरकारी आैर 106.43 हैक्टेयर वन विभाग की है। चौथे चरण में बनने वाले बांध के लिए 97.23 हैक्टेयर में से 46.08 निजी, 22.67 हैक्टेयर सरकारी और 28.48 हैक्टेयर जमीन वन विभाग की है। अब यदि समय रहते प्रोजेक्ट पर काम हुआ है तो देवास-2 से ज्यादा पानी की उपलब्धता निश्चित हो जाएगी। देवास द्वितीय चरण में 302 एमसीएफटी भराव क्षमता का आकोदड़ा बांध और 85 एमसीएफटी वाला का मादड़ी बांध है। अगले चरण में बनने वाले बांध 703 और 390 एमसीएफटी भराव क्षमता के होंगे। ऐसे में देवास द्वितीय चरण के मुकाबले नाथियाथल और अंबावा में 706 एमसीएफटी ज्यादा पानी रोका जा सकेगा।

ऐसे उलझा था प्रोजेक्ट

सबसे पहले यह योजना बनी कि देवास तीसरे आैर चौथे चरण के तहत दो बांध बनाकर पानी 11.05 किमी लंबी सुरंग से देवास-2 के तहत बने आकोदड़ा बांध में लाया जाएगा। यहां से पानी आकोदड़ा बांध की 11.05 किमी लंबी टनल से होता हुआ उदयपुर की झीलों में आएगा। वर्ष 2015 में 1187 कराेड़ की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई। इसी बीच राज्य मंत्रिमंडल फेरबदल में जलदाय मंत्री बनी राजसमंद विधायक किरण माहेश्वरी ने गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के ड्रीम प्रोजेक्ट में बदलाव करवा दिया। किरण ने देवास 3-4 का पानी राजसमंद ले जाने के लिए साल 2015 के बजट में डीपीआर बनाने और 2016 के बजट में पानी राजसमंद ले जाने के लिए 1064 करोड़ की घोषणा भी करवा दी, मगर परियोजना अटकी रही। इसी साल 12 फरवरी को बजट में मुख्यमंत्री की घाेषणा में यह भी शामिल हो गया कि उदयपुर आैर राजसमंद में दीर्घकालीन आवश्यकता पूरी करने के लिए जाखम और देवास 3-4 से पानी लाने के लिए तीन हजार करोड़ की परियोजना बनेगी।

कम से कम पानी स्टाेरेज के बंदोबस्त तो होंगे

यह परियोजना अब तक राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई में उलझकर रह गई थी। पानी उदयपुर आए या राजसमंद जाए, इस पर निर्णय नहीं होने से प्रोजेक्ट बढ़ ही नहीं पा रहा था। अब जब दोनाें बांध और टनल बनाना तय हुआ है तो यह भी पक्का हो गया है कि कम से कम व्यर्थ बहकर जा रहे पानी को रोकने के बंदोबस्त हो जाएंगे। तकनीकी जानकारों के साथ ही भास्कर ने भी समय-समय पर इस बात पर जोर दिया था कि देवास 3-4 का पानी कहां जाए इस पर कभी भी निर्णय हो सकता है, लेकिन उससे पहले दोनों बांध तो बन जाएं।

एस्टीमेट भेजा है, स्वीकृति का इंतजार है

देवास परियोजना के तीसरे और चाैथे चरण के लिए जलसंसाधन विभाग ने 696 करोड़ का एस्टीमेट बनाया है। परियोजना पेयजल से जुड़ी होने से हमने प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए एस्टीमेट जलदाय विभाग को भेज दिया है। यह स्वीकृति मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। शिखर अग्रवाल, प्रमुख शासन सचिव, जल संसाधन विभाग, जयपुर

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