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निगम के लीगल एक्शन के डर से छोड़ दिए दो करोड़ की सरकारी भूमि से कब्जे

3 वर्ष पहले
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नगर निगम को सेक्टर 3 में करीब दो करोड़ रुपए बाजार मूल्य की अपनी 7200 वर्गफीट जमीन अतिक्रमियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का डर दिखाने भर से मिल गया है। तीन जनों ने जमीन मालिक होने के दावे गिर्वा ग्राम न्यायालय में किए थे। हालांकि साबित नहीं कर पाए। निगम का पुलिस कार्रवाई का रुख देख तीनों ने दावे वापस ले लिए। एक का मामला विचाराधीन है।

सेक्टर 3 निवासी ओमप्रकाश सिंह पुत्र धनुषबाण सिंह जादौन, गगन पुत्र महेश श्रीवास्तव, प्रवीण सिंह पुत्र वीरम सिंह चौहान आैर उदय सिंह पुत्र हरि सिंह दूलावत ने साल 2016 में गिर्वा ग्राम न्यायालय में दावे पेश किए थे। इनमें बताया कि मनवाखेड़ा में आराजी 337 के तहत 2400 वर्गफीट भूमि के चार प्लॉट पर उनका कब्जा है। चारों ने इन भूखंडों पर मालिकाना हक बताया। ओमप्रकाश के मुताबिक कलड़वास पंचायत ने 1982 में उसकी माता फूल कंवर को 2400 वर्गफीट भूखंड का निशुल्क पट्टा दिया था। प्रवीण सिंह ने माता शांतिबाई को निशुल्क पट्टा मिलने का दावा किया, जबकि गगन श्रीवास्तव व उदयसिंह ने भी निशुल्क पट्टे मिलना बताया था। निगम ने 15 मई 2016 को सुनवाई का मौका दिए बिना इन भूखंडों की बाउंड्री और इन पर बनी झोपड़ियां तोड़ डाली थीं।

नगर निगम ने कोर्ट में भूमि सरकारी बताई

निगम के वकील अशोक सिंघवी ने अदालत में जवाब पेश किया कि विवादित चारों प्लॉट दावेदारों के नहीं हैं। उन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जे किए हुए हैं। जिस खसरा नंबर 337 को आबादी भूमि बताई गई है, सरकारी रिकॉर्ड में वह मगरा नाम से दर्ज है। ग्राम पंचायत काे सिर्फ आबादी के पट्टे जारी करने का अधिकार है। पट्टों की सत्यता के लिए नगर निगम कमिश्नर ने बीडीओ गिर्वा को पत्र लिखा था। बीडीओ ने बताया कि भूमि के पट्टे आबंटन से संबंधित रिकॉर्ड दर्ज नहीं है। राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन यूआईटी के नाम है, जिसका हस्तांतरण नगर निगम में हो चुका। सिंघवी ने जवाब पेश करने के बाद निगम कमिश्नर को चारों अतिक्रमियों के खिलाफ पुलिस में एफआईअार दर्ज कराने को कहा। अगले ही दिन परिवादी गगन, ओमप्रकाश व प्रवीण ने अदालत में अर्जी पेश कर अपने दावे उठा लिए। इससे 7200 वर्गफीट जमीन पर नगर निगम का कब्जा स्वत: हो गया। परिवादी उदय सिंह का दावा चल रहा है।

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