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कार्ड उदयपुर के खाता धारक के पास फरीदाबाद के एटीएम से निकाले 12 हजार

3 वर्ष पहले
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शहर में एटीएम कार्ड की क्लोनिंग कर बैंक खाते से पैसे निकालने वाला गिरोह फिर एक्टिव हुआ है। भूपालपुरा थाने में परिवाद दर्ज हुआ है, जिसमें महिला के बैंक खाते से फरीदाबाद स्थित एटीएम काउंटर से 12 हजार रुपए निकाल लिए गए। एटीएम कार्ड महिला के पास ही था। पिछले माह भी ऐसी चार वारदातों में करीब डेढ़ लाख रुपए की ठगी हुई थी। मामले बढ़ने के बाद भी सुरक्षा के लिए न तो बैंक जिम्मेदारी उठा रहे हैं और न ही पुलिस की साइबर सेल। अब तक जांच भी पूरी नहीं हुई है। भूपालपुरा थाने में परिवादी चंदा शर्मा निवासी कुशाल बाग (आयड़) ने बताया कि 3 अप्रैल को खाते से 10 हजार रुपए निकाले। फिर 4 अप्रैल को 100 रुपए निकाले। दोनों ट्रांजेक्शन देहली गेट स्थित आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम से किए थे। 10 अप्रैल को फिर से एटीएम गई, लेकिन नकद निकासी नहीं हो पाई। तीन-चार एटीएम में जाने के बाद मिनी स्टेटमेंट निकाला तो जीरो बैलेंस था और 12 हजार रुपए 5 अप्रैल को निकाले गए। तब एटीएम कार्ड चंदा के पास ही था। चंदा ने यह भी कहा कि इस बीच किसी प्रकार का कोई फर्जी कॉल भी नहीं आया।

साइबर क्राइम
ऐसे होती है
एटीएम क्लोनिंग

एक्सपर्ट बताते हैं कि एटीएम मशीन से पैसे निकालने के लिए मशीन में जिस जगह एटीएम कार्ड डालते हैं वहां पर ठगी करने वाले एक क्लोनिंग मशीन फिट कर देते हैं जो आसानी से नजर नहीं आती। जैसे ही पैसे निकालने के लिए एटीएम कार्ड स्वैप करते हैं, क्लोनिंग मशीन कार्ड नंबर से लेकर पिन नंबर तक रीड कर लेती है। इसके बाद क्लोनिंग मशीन के आधार पर ठगी करने वाले दूसरा कॉपी कार्ड बना लेते हैं और फिर ठगी करते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

एक्सपर्ट बताते हैं कि एटीएम मशीन में एटीएम कार्ड को स्वैप करने से पहले देख लें कि उसमें कुछ अन्य मशीन या जाली जैसा लगा हुआ है या नहीं। इसके साथ ही एटीएम मशीन कीबोर्ड पर भी इसी प्रकार एक पेपर लगाते हैं जो हूबहू की बोर्ड जैसे ही लगता है। अपने पिन नंबर टाइप करने से पहले देखें कि कहीं की बोर्ड ऊबड़-खाबड़ तो नहीं।

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