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यूके में सालभर में जितना अनाज खपत होता, उतना भारत में हो जाता है बर्बाद, बचाने के लिए स्किल डेवलपमेंट, रिसर्च हो

3 वर्ष पहले
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उदयपुर | उद्योग मंत्री राजपालसिंह शेखावत ने कहा है कि यूके में सालभर में जितने खाद्यान्न का उपभोग होता है, उतना भारत में बेकार हो जाता है। इसे बचाने का एक ही रास्ता है कि इस क्षेत्र में स्किल डवलपमेंट और रिसर्च हो। सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर खड़े करने से कुछ नहीं होगा, फूड प्रोसेसिंग में रिसर्च और स्किल डवलपमेंट की जरूरत है।

शेखावत बुधवार को उदयपुर चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (यूसीसीआई) के पीपी सिंघल सभागार में खाद्य प्रसंस्करण एवं प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना की कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। यूसीसीआई, एसोचैम, एमपीयूएटी और खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की इस कार्यशाला में शेखावत बोले कि देश में अनाज का इतना उत्पादन होता है कि हर व्यक्ति को तीन समय का भोजन मिल सके। हमारे यहां हर साल करीब 92 हजार करोड़ का खाद्यान्न बरबाद हो जाता है। मंत्री बोले, हमने आईआईएम-यू, आईआईटी जोधपुर तो खोल दिए, लेकिन क्या इन सेंटर्स पर उस स्तर का स्किल डवलप हो रहा है, जिसके लिए ये संस्थान महत्व रखते हैं। इस पर यूसीसीआई अध्यक्ष हंसराज चौधरी ने बताया कि यूसीसीआई ने यहां मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के साथ स्किल डवलपमेंट सेंटर की स्थापना का एमओयू किया है। इस सेंटर के तहत फूड प्रोसेसिंग, आईटी, सिविल, मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में क्षमता विकास के काम होंगे। खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के संयुक्त सचिव पराग गुप्ता ने फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को लेकर केन्द्र सरकार की सात योजनाएं बताईं। कहा कि केन्द्र सरकार की मदद से युवा इस क्षेत्र में इंडस्ट्री स्थापित कर सकते हैं। कार्यशाला में यूएस एम्बेसी के डेलीगेट डगलस फलोवर और जैक माइनर, एसोचैम के वरिष्ठ निदेशक डॉ. ओम एस. त्यागी, यूसीसीआई के संरक्षक अरविन्द सिंघल, जिला उद्योग केन्द्र के संयुक्त निदेशक विपुल जानी, ग्रीन टेक मेगा फूड पार्क लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अजय गुप्ता सहित कई उद्यमी और विशेषज्ञ शामिल हुए।

यूसीसीआई में कार्यशाला में मौजूद लोग और संबोधित करते मंत्री।

यह भी बोले मंत्री- खाद्यान्न प्रसंस्करण हमारे डीएनए में

मंत्री ने कहा कि खाद्यान्न प्रसंस्करण हमारे डीएनए में है। घरों में बनने वाले आलू के चिप्स इसी का हिस्सा हैं। किसान की आमदनी दोगुनी करने के लिए सिर्फ पैदावार बढ़ाने से कुछ नहीं होगा। जरूरी है कि खाद्यान्न के प्रसंस्करण पर आधारित उद्योगों की भी स्थापना हो। नाबार्ड उदयपुर के डीडीएम ने नाबार्ड से पोषित परियोजनाओं की जानकारी दी और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास एवं क्षमतावर्धन के लिए 2 हजार करोड़ रुपए स्वीकृत करने की जानकारी दी।

यूसीसीआई ने बताया- इंडस्ट्री के लिए हमारे पास भूमि नहीं है

यूसीसीआई ने उद्योग मंत्री के सामने इंडस्ट्री के लिए भूमि की उपलब्धता नहीं होने की समस्या रखी। अध्यक्ष चौधरी ने कहा कि सराड़ा को इंडस्ट्रीयल हब बनाने के लिए 10 साल से भूमि अवाप्ति की योजना चल रही थी, लेकिन निरस्त हो गई। कलड़वास में अवाप्ति हो गई, लेकिन इंडस्ट्री को जमीन नहीं मिली। शेखावत ने समाधान का भरोसा दिलाया।

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