गुरुद्वारों में होंगे शबद, कथा से निहाल करेंगे रागी जत्थे, श्रद्धालु छकेंगे गुरु का अटूट लंगर
खालसा पंथ के स्थापना दिवस बैसाखी पर शनिवार को गुरुद्वारों में शबद कीर्तन, कथा, गुरु के अटूट लंगर के आयोजन होंगे। गुरुद्वारों में मत्था टेकने श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी। सिख कॉलोनी स्थित गुरुद्वारा सचखंड दरबार में सुबह 7 बजे निशान साहब का चोला बदला जाएगा। साढ़े सात बजे सहज पाठ साहब का विधिवत समापन होगा। पहला दीवान 7.45 से 9 बजे तक और मुख्य दीवान सुबह 10 से दोपहर 1.30 बजे तक सजेगा। इसमें भाई जगतार सिंह दिल्ली हजूरी रागी शीशगंज गुरुद्वारा का जत्था शबद-कीर्तन और कथा करेगा। गुरु का अटूट लंगर दोपहर 1.30 बजे से बरतेगा, जो देर शाम तक चलेगा। सुबह 9.30 से दोपहर 1.30 बजे तक रक्तदान और चिकित्सा जांच शिविर लगेगा। लंगर बनाने की सेवा शुरू हो जाएगी।
इतिहास के झरोखे से : जब मेवाड़ में मुगलों से भिड़े थे गुरु गोविंदसिंह
उदयपुर. ईस्वी 1699 में वैशाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना करने वाले सिखों के दसवें गुरु गाेविंदसिंह 1708 ईस्वी में मेवाड़ में आए थे। बताते हैं कि दिल्ली से महाराष्ट्र के नांदेड़ साहिब जाते समय गुरु गोविंदसिंह 1708 में वैशाख छठ यानी तीन अप्रैल को चित्तौड़गढ़ नगर में आए थे। तब दुर्ग पर जाने के लिए गुरू गोविंदसिंह और उनके सेवादार पहले दरवाजे पाडनपोल पहुंचे। यहां मुगल शासकों के प्रहरियों ने उनको ऊपर जाने से रोक दिया। इस पर वहां मुगलों और सिखों के बीच युद्ध हुआ, जिसमें सेवादार भाई मानसिंह और 12 वर्षीय भाई जोरावरसिंह तथा अन्य 19 सिख वीरगति को प्राप्त हुए थे।
गुरु गोविंदसिंह ने इन 21 सेवादारों का अंतिम संस्कार चार अप्रैल को गंभीरी नदी किनारे किया था। यह स्थान वर्तमान में शंकरघट्टा कहलाता है। कुछ साल पहले ही इसके बारे में पता चलने पर अब यह स्थान स्थानीय सिख समुदाय के लिए आस्था का केन्द्र बन गया है। यहां प्रतिवर्ष वैशाख की छठी को सिख समुदाय की ओर से शबद कीर्तन का आयोजन किया जाता है। कहा जाता है कि इससे पहले गुरु गोविंदसिंह भीलवाड़ा के बागोर साहिब में भी रुके थे। नांदेड़ साहिब जाने के बाद वहां गुरू गोविंदसिंह दिव्य ज्योति में विलीन हो गए थे। जैसा कि गुरुद्वारा गुरुसिंघ सभा चित्तौड़गढ़ के अध्यक्ष हरमीतसिंह शेरू, उपाध्यक्ष संदीपसिंह शम्मी ने पटियाला की पंजाब यूनिवर्सिटी के पब्लिकेशन ब्यूरो से प्रकाशित और डॉ. फौजासिंह द्वारा संपादित पुस्तक ट्रैवल्स ऑफ गुरु गोबिंदसिंह के हवाले से बताया।
चित्तौड़गढ़ में गंभीरी के किनारे शंकर घट्टा, जहां हर साल आयोजन होता है।
चित्तौड़गढ़ में गंभीरी के किनारे शंकर घट्टा, जहां हर साल आयोजन होता है।