रोटी-बेटी के संबंधों से आती है समरसता
उदयपुर| समुत्कर्ष समिति की विचार गोष्ठी शुक्रवार को फतह स्कूल में हुई। ‘भारत में समरसता और समानता’ विषय पर वक्ताओं ने कहा कि देश की एकता, अखंडता एवं समरसता निर्माण में संतों का बड़ा योगदान रहा है। समाज के सभी घटकों में परस्पर समानता के भाव से ही समरसता पनप सकेगी। समरसता विभाजन नहीं, बल्कि समाजों के साथ रोटी-बेटी का संबंध रखने से आती है। समुत्कर्ष के सम्पादक रामेश्वर प्रसाद शर्मा ने माधव सदाशिव गोलवलकर के इस कथन से विषय का निरूपण किया। जसवन्त राय ने सांख्य दर्शनाचार्य महर्षि कपिल के विचार ‘मानुष्यश्चैक विधि:’ को विवेचित किया। डॉ. नरेन्द्र टांक, भवानीशंकर, श्याम सुंदर चौबीसा, प्रतिमा सामर, दिलीप जैन व हरिदत्त शर्मा ने भी विचार रखे। प्रकाश आमेटा, ललित जैन, गिरीश चौबीसा, संगीत भावसार, राकेश शर्मा, मुकेश जैन, पुष्कर माली आदि उपस्थित थे।