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प्रदेश के 45 विस क्षेत्रों में सरकारी कॉलेज नहीं, यहां के प्रतिनिधि कैबिनेट में रहे, पर नहीं ला पाए कॉलेज

3 वर्ष पहले
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प्रदेश में उच्च शिक्षा के हालात अब भी दयनीय हैं। 200 में से 45 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां आज तक सरकारी कॉलेज नहीं हैं। जनप्रतिनिधियों में इच्छाशक्ति की कमी ही कहेंगे कि मेवाड़ से सरकार में मंत्री के रूप में दबदबा रखने वाले गुलाबसिंह शक्तावत जैसे कांग्रेस के कद्दावर नेता भी अपने क्षेत्र वल्लभनगर में सरकारी कॉलेज नहीं खुलवा पाए। इनके अलावा मेवाड़ में भाजपा और कांग्रेस के ऐसे कई जनप्रतिनिधि सरकार में लंबे समय तक मंत्री रहे, लेकिन अपने क्षेत्रवासियों को उच्च शिक्षा के लिए सरकारी कॉलेज की सौगात नहीं दिलवा सके। ऐसे में यहां के हजारों छात्रों को कॉलेज के लिए या तो कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है या वे अपनी पढ़ाई को स्कूल में ही विराम लगा देते हैं।

प्रदेश के इन क्षेत्रों में भी आज तक नहीं खुले सरकारी कॉलेज

अलवर ग्रामीण, बानसूर, कठूमर, वैर, मांडल, जहाजपुर, बिकानेर पश्चिम, कोलायत, हिण्डौली, केशोरायपाटन, रायसिंहनगर, संगरिया, पीलीबंगा, जोटवाड़ा, आमेर, जमवारामगढ़, हवामहल, विद्यानगर, सिविललाइंस, किशनपोल, आदर्श नगर, सांगानेर, बगरू, बस्सी, चाकसू, सांचोर, पिलानी, सूरजगढ़,लोहावट, सरदारपुरा,जोधपुर, लाडनू , मकराना, नौवां, लक्ष्मणगढ़, धोद, दांतारामगढ़, श्रीमाधोपुर।

यहां के जन प्रतिनिधि भी राज्य सरकार में लंबे समय तक रहे कद्दावर बावजूद कॉलेज नहीं खुलवा पाए

वल्लभनगर : प्रदेश की राजनीति में वल्लभनगर विधानसभा सीट का अपना दबदबा रहा। कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलाबसिंह शक्तावत इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधि के रूप में सरकार में गृहमंत्री जैसे अहम विभाग के मंत्री रहे, लेकिन अपने निर्वाचन क्षेत्र मेंं सरकारी कॉलेज नहीं खुलवा पाए। पिछली सरकार में अशोक गहलोत के समय शक्तावत के बेटे गजेंद्र सिंह शक्तावत को संसदीय सचिव बनाया गया, लेकिन वे भी क्षेत्र को उच्च शिक्षा के लिए सरकारी कॉलेज की सौगात नहीं दिला पाए।

उदयपुर ग्रामीण : उदयपुर शहर से सटे ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में आज तक सरकारी कॉलेज नहीं खुल पाया है। भाजपा से चुन्नीलाल गरासिया और कांग्रेस के खेमराज कटारा प्रदेश सरकार में काफी समय तक मंत्री रहे। लेकिन अपने निर्वाचन क्षेत्र में सरकारी कॉलेज की सुविधा नहीं दिलवा सके। ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों छात्रों को कॉलेज के लिए 30 से 35 किमी दूर शहर आना पड़ता है।

घाटोल और गढ़ी : बांसवाड़ा जिले की घाटोल विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक बने नानालाल निनामा सरकार में संसदीय सचिव के पद रहे। इसी जिले की गढ़ी विधानसभा सीट से विधायक जीतमल खांट वसुंधरा सरकार में मंत्री बने। लेकिन ये भी अपने निर्वाचन क्षेत्र को सरकारी कॉलेज की सौगात नहीं दिलवा पाए।

बागीदौरा : बांसवाड़ा जिले के बागीदौरा विधानसभा सीट से विधायक बने महेंद्रजीत सिंह मालवीय गहलोत सरकार में जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री रहे। कैबिनेट मंत्री के रूप में सरकार में जगह बनाने के बावजूद मालवीय अपने निर्वाचन क्षेत्र में सरकारी कॉलेज खुलवाने में सफल नहीं हो सके।

आसपुर : डूंगरपुर जिले के आसपुर विधानसभा क्षेत्र के लोगों को भी अब तक सरकारी कॉलेज खुलने का इंतजार है। प्रदेश में जब कांग्रेस का दबदबा था तो आसपुर से विधायक बने महेंद्र परमार सरकार में मंत्री बने, लेकिन वे अपने क्षेत्र के लिए सरकारी कॉलेज नहीं खुलवा सके।

बड़ी सादड़ी : चित्तौड़ जिले की बड़ी सादड़ी विधानसभा सीट मेवाड़ में राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई वाली सीट मानी जाती है। इस विधानसभा क्षेत्र में भी अभी तक सरकारी कॉलेज नहीं खुल पाया है। पिछले कई सालों से यहां के लोग कॉलेज की मांग कर रहे हैं।

पिछले दो-तीन साल में इन क्षेत्रों में खुले हैं कॉलेज

आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 140 विधानसभा क्षेत्रों में अलग-अलग सरकारी कॉलेज हैं। 2017-18 में अराई, मसूदा, मुंडावर, बिजौलिया और दूदू में 5 नए सरकारी कॉलेज खोलने की स्वीकृति नवंबर 2017 में जारी की गई। जिसमें 2018-19 सत्र से अध्यापन शुरू होगा। वहीं 2018-19 के बजट बहस के जवाब में मुख्‍यमंत्री ने 7 उपखंडों में नए सरकारी कॉलेज खोलने की घोषणा की थी। जिसके बाद प्रदेश के 155 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 249 सरकारी कॉलेज होंगे।

कॉलेज की जरूरत है, सरकार के पास बजट नहीं

क्षेत्र को सरकारी कॉलेज की जरूरत है। यहां के लोग भी अकसर इसकी मांग करते हैं। सरकार को इसे लेकर कई बार पत्र लिख चुका हूं। अपने तरफ से प्रयास में कोई कमी नहीं है। बजट की उपलब्धता को देखते हुए शायद ये संभव नहीं हो पाया हो। - रणधीरसिंह भींडर, निर्दलीय विधायक वल्लभनगर।

उच्च शिक्षा मंत्री मेवाड़ की, फिर भी कॉलेज नहीं

मैंने गहलोत सरकार में संसदीय सचिव रहने के दौरान भींडर, वल्लभनगर में सरकारी कॉलेज खुलवाने का प्रयास किया पर सफलता नहीं मिली। अब तो उच्च शिक्षा मंत्री मेवाड़ की ही हैं, उसके बावजूद कॉलेज नहीं खुला तो जनप्रतिनिधियों की इच्छा शक्ति की कमी ही है। मंत्री जी को लोगों की मांग पर ध्यान देना चाहिए था। - गजेंद्र सिंह शक्तावत, पूर्व विधायक वल्लभनगर एवं पूर्व संसदीय सचिव।

किरण के पास मेवाड़ में कॉलेज खुलवाने का अब भी पूरा मौका

उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी मेवाड़ का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसके बाद भी संभाग के कई इलाकों में कॉलेज नहीं हैं। ऐसे में मेवाड़ के जनप्रतिनिधि थोड़ा प्रयास करते तो उनके निर्वाचन क्षेत्र को भी सरकारी कॉलेज की सौगात मिल सकती थी। हालांकि इस बार बजट सत्र मेंं बिच्छीवाड़ा डूंगरपुर और मावली उदयपुर में सरकारी कॉलेज खोलने की घोषणा हुई है।

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