तपस्वियों ने किए पारणे, आचार्य का पाठ- तप में न आए अहं भाव
उदयपुर | अक्षय तृतीया पर बुधवार को वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक महासंघ और चातुर्मास आयोजन समिति के साझे में देशभर के 86 तपस्वियों के वर्षीतप पारणे आचार्य डाॅ. शिवमुनि के सान्निध्य में हुए। आचार्य ने सीख दी कि साधना और तप वही सार्थक है, जिसमें अहंकार का रंच मात्र भी न हो।
चित्रकूट नगर में आचार्य डाॅ. शिवमुनि ने तपस्वियों के पारणे से पूर्व मंगल पाठ सुनाया। उन्होंने कहा कि यह परम्परा तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के युग से चली आ रही है। तपस्वी मन में ऐसे भाव कभी न लाएं कि यह तप मैंने किया, क्योंकि तप में अहंकार के लिए कोई जगह नहीं है। शिरीष मुनि ने कहा कि तप आत्मा की शुद्धि के लिए विशेष महत्व रखता है। इस मौके पर युवाचार्य महेन्द्र ऋषि की प्रेरणा से लिखित मोक्ष पथ पुस्तक का विमोचन किया गया। महासंघ अध्यक्ष ओंकारसिंह सिरोया, चातुर्मास संयोजक वीरेंद्र डांगी, निर्मल पोखरना, अखिल भारतवर्षीय जैन श्रमण संघीय श्रावक समिति राष्ट्रीय चेयरमैन सुमतिलाल कर्णावट आदि मौजूद थे।
अक्षय तृतीया पर बुधवार को महोत्सव में शामिल संत व श्रावक।
सर्वऋतु विलास में प्रतिष्ठा महोत्सव शुरू
सर्वऋतु विलास के जैन मंदिर में तीन दिवसीय जिन बिम्ब प्रतिष्ठा महोत्सव शुरू हुआ। वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत ध्वजारोहण और संघस्थ मुनि पीयूष सागर की छठी दीक्षा जयंती मनाई गई। धर्मसभा में मुनि प्रसन्न सागर ने कहा कि संतान निर्माण में पहला कार्य मां, दूसरा पिता और तीसरा कार्य गुरु का होता है। यातायात को नियंत्रित करना यातायात पुलिस का काम है उसी तरह समाज में उत्पन्न गतिरोधों को दूर करने का काम संतों का है।
कानपुर में पंचकल्याणक महोत्सव शुरू : आर्यिका सुप्रकाशमती और मुनि आज्ञासागर के सानिध्य में कानपुर के आदिनाथ मंदिर में पांच दिन का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव शुरू हुआ। जिन मंदिर में अभिषेक हुआ। श्रावकों ने ध्वजारोहण, चित्र अनावरण, मंडप उद्घाटन, शांतिधारा के उपक्रम किए। धर्मसभा में आर्यिका ने कहा कि पुण्य समाप्त हो जाए तो प्रकृति भी साथ छोड़ देती है। मुनि ने भी धर्म प्रेरणा दी। समाज अध्यक्ष शांतिलाल जैन ने बताया कि गर्भ कल्याणक पूर्व विधि क्रिया में सौधर्म इन्द्र व नाभिराजा दरबार, र| वृष्टि, माता के सोलह स्वप्न दर्शन आदि कार्यक्रम हुए।