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गार्ड ने कहा-ट्रेन में पुलिस वालों की आंखों में मिर्च पाउडर झोंककर भाग गया था कैदी

3 वर्ष पहले
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सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में सोमवार को मुंबई सीबीआई स्पेशल कोर्ट में ट्रेन के गार्ड हीरालाल आहरी और असिस्टेंट लोको पायलट घनश्याम के बयान हुए, जिससे तुलसी फरार हुआ था। हीरालाल ने बताया कि श्यामला जी से पहले एक कैदी पुलिस वालों की आंखों में मिर्च फेंक फरार हुआ था। हमने इसकी गार्ड लॉगबुक में एंट्री की थी। असिस्टेंट लोको पायलट घनश्याम ने भी इन बयानों की इसकी पुष्टि की। सीबीआई ने दोनों को होस्टाइल किया।

कोर्ट में हीरालाल ने बयान दिए कि वह हिम्मतनगर स्टेशन से गार्ड ड्यूटी पर उदयपुर मेल ट्रेन में बैठा था। उसने इंजन से आखिरी डिब्बे तक राउंड लिया था। जोर-जोर से बात करने के कारण उसका ध्यान आखिरी डिब्बे में बैठे कुछ पुलिसवालों और पास बैठे कैदी पर गया। कैदी के हाथ में हथकड़ी थी। राउंड लेने के बाद वह गार्ड बोगी में चला गया। देर रात श्यामला जी से कुछ पहले ट्रैक का काम चलने से ट्रेन 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। अचानक कुछ पटाखों जैसी आवाज सुनी और ट्रेन रुक गई। लोको पायलट राजेन्द्र ने वॉकी-टॉकी पर बताया कि आखिरी डिब्बे में चेन पुलिंग होने से ट्रेन रुकी है। इस पर वह आखिरी बोगी पहुंचा। वहां बाहर कुछ पुलिस वाले आंख मसल रहे थे, उनके कपड़ों और फर्श पर मिर्च पाउडर पड़ा था।

पुलिस वालों ने बताया कि वे राजस्थान पुलिस से है और एक कैदी साथियों के सहयोग से हमारे आंखों में मिर्च पाउडर डालकर फरार हुआ है। दो पुलिस वाले कैदी के पीछे भी भागे थे। ट्रैक पर देखा तो एक मोबाइल पड़ा था, जिसे वहां से उठाया। ट्रेन पुल पर रुकी थी और नीचे नदी थी, तो कोई सवारी नहीं गिर जाए, इसलिए ट्रेन को पुल से थोड़ा आगे बढ़ाकर रोका। कैदी के पीछे गए पुलिसवाले गैंगमैन के साथ वापस ट्रेन पहुंचे। गार्ड हीरालाल ने बताया कि उसने पूरा घटनाक्रम, पुलिसवालों के नाम नारायण सिंह, युद्घवीर, करतार, दलपत और ट्रेन देरी का कारण गार्ड लॉग बुक में लिखा, इसके बाद ट्रेन श्यामला जी पहुंची। श्यामला जी स्टेशन पर इस घटनाक्रम की सूचना दी और पुलिस वालों को वहीं उतारा गया।

क्रॉस में पुलिस एएसआई नारायण सिंह के वकील अभिषेक पाराशर के पूछने पर गार्ड ने बताया कि वह पटाखों जैसी आवाज गोलियों की भी हो सकती है। ट्रैक पर पड़ा मोबाइल पुलिस वालों के सुपुर्द किया था, इस दौरान वहां असिस्टेंट लोको पायलट घनश्याम भी आ गए थे।

दो गवाहों के और हुए बयान
हीरालाल के बाद असिस्टेंट लोको पायलट घनश्याम के बयान हुए, उसने भी कैदी के पुलिसवालों के आंखों में मिर्च पाउडर डालकर ट्रेन से भागने, गार्ड को ट्रैक पर पड़ा मोबाइल मिलने और उसे पुलिसवालों के सुपुर्द करने के ही बयान दिए। तीसरे बयान तत्कालीन डीएसपी शाखा के हेडकांस्टेबल खूमसिंह के हुए। इन्होंने सोहराबुद्दीन के क्रिमिनल रिकॉर्ड की काेर्ट को जानकारी दी।

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