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सत्र शुरू हुए दो माह बीते, नहीं आईं एनसीईआरटी की पुस्तकें, किताबों के लिए भटक रहे हैं छात्र

3 वर्ष पहले
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स्कूलों में नया सत्र शुरू हुए पौने दो माह हो गए लेकिन बाजार में एनसीईआरटी के सभी विषयों की पुस्तकें अब तक उपलब्ध नहीं हैं। खासकर कक्षा 9वीं से 12वीं तक में गणित और अंग्रेजी विषय की पुस्तक शहर के ज्यादातर विक्रेताओं के पास नहीं है। छात्रों के लिए ये पुस्तकें सत्र शुरू होने से पहले मार्च में ही उपलब्ध हो जानी चाहिए थी। मजबूरन छात्रों ने उन विषयों की रेफरेंस पुस्तकें ज्यादा कीमत पर निजी प्रकाशकों से खरीद ली। हालात ये हैं कि एक-एक विषय की पुस्तकों के लिए छात्रों को भटकना पड़ रहा है। सरकार ने सीबीएसई के सभी स्कूलों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया हुआ है लेकिन स्थिति ये है कि जिले के 250 स्कूलों में से कक्षा 9वीं से 12वीं के पांच हजार से ज्यादा छात्र एनसीईआरटी की पुस्तकें नहीं पढ़ पा रहे हैं।

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विक्रेता : सुधरनी चाहिए पुस्तक वितरण व्यवस्था

विश्वविद्यालय मार्ग स्थित पुस्तक विक्रेता महावीर प्रसाद ने बताया कि उनके यहां कक्षा एक से 12वीं तक सभी विषयों की एनसीईआरटी पुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं। अभिभावक लेने आते हैं तो उन्हें कुछ ही विषय की किताबें दे पाते हैं। ऐसे में वे लौट जाते हैं। एनसीईआरटी का पुस्तक वितरण सिस्टम सुधरना चाहिए। बापू बाजार स्थित पुस्तक विक्रेता राकेश ने बताया कि उनके यहां कक्षा 9 से 12वीं तक पुस्तकें अब पहुंच रही हैं। जबकि इनकी डिमांड सत्र शुरुआत में मार्च-अप्रेल में थी। कक्षा 9वीं की इस साल बदली गई अंग्रेजी पुस्तक को लेकर छात्र और स्कूल संचालक असमंजस में रहे। ये पुस्तक बहुत देरी से बाजार में आई है।

अप्रैल से पहले ले चुके पुस्तकें : मांडोत

सत्र जब एक अप्रेल को शुरू होता है तो पुस्तकें मई-जून तक क्यों पहुंचती हैंω समय निकलने के बाद उनका क्या उपयोगω? जिले में ज्यादातर बच्चों को पुस्तकें नहीं मिली तो उन्होंने निजी प्रकाशक की पुस्तकें ली हैं। - अरुण मांडोत, डायरेक्टर माउंट लिट्‌रा जी स्कूल

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दुनिया में बदलाव हो रहा है लेकिन एनसीईआरटी ने वर्ष 2005 के बाद से अपने पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं किया। हम पुस्तकों में पुरानी चीजें ही पढ़ रहे हैं जिनमें कुछ जानकारी वर्तमान परिप्रेक्ष्य में गलत साबित हो रही हैं। प्रतिवर्ष पुस्तकों में जानकारी अपडेट होनी चाहिए। - लविश शर्मा, स्टूडेंट (10वीं)

11वीं अर्थशास्त्र की पुस्तक में पेज-143 पर जीडीपी का 30% होने के रूप में आधारभूत संरचना में भारत का निवेश दर्शाया गया है, जबकि ऑनलाइन देखा तो यह 10% है। -उत्कर्ष कुमार, छात्र (11वीं)

मेरे स्कूल में एनसीईआरटी की बुक्स नहीं पढ़ाई जाती। टीचर बोलते हैं कि एनसीईआरटी की बुक्स की गुणवत्ता ठीक नहीं है। जो बुक्स पढ़ाई जा रही हैं वे एनसीईआरटी की बुक्स की तुलना दो-तीन गुना महंगी हैं। - लोकेश उपाध्याय, छात्र (कक्षा-9)

कंटेंट अच्छा, क्वालिटी बेकार : बाबेल

9वीं कक्षा की बुक्स बदली, लेकिन इसकी सूचना स्कूलों को मार्च में मिली। तब तक छात्रों ने पुरानी बुक्स खरीद ली थी। एनसीईआरटी का कंटेंट अच्छा है लेकिन पुस्तकों की बाइंडिंग, पेपर क्वालिटी अच्छी नहीं है। - सुनील बाबेल, एडमिनिस्ट्रेटर, सीपीएस स्कूल

पुस्तकें समय पर नहीं मिल रही : सोमानी

एनसीईआरटी को सत्र की शुरुआत से पहले पुस्तकें बाजार में उपलब्ध करानी चाहिए ताकि छात्रों को भटकना नहीं पड़े। पुस्तकें नहीं मिलने से आधी पुस्तकें एनसीईआरटी और बाकी अन्य निजी प्रकाशक की पढ़ रहे हैं। -शैलेन्द्र सोमानी, डायरेक्टर, एमडीएस

मेरा बेटा 8वीं कक्षा में है। नागरिक पुस्तक के दो अध्याय पढ़े जिसमें कानून और न्यायपालिका को पढ़कर लगा कि इस पुस्तक का कोई उपयोग नहीं है। जिसमें अवधारणाओं को एक बहुत ही जटिल और अनिश्चित तरीके से बताया है। - हरेन्द्रपाल सिंह, अभिभावक

पुस्तकों में नियमित नई जानकारी और तथ्य अपडेट हो।

पुस्तकों की प्रिंटिंग क्वालिटी में सुधार हो और प्रिंटिंग समय पर हो। ताकि सत्र शुरुआत से पहले पुस्तकें मिले।

देशभर में एक पाठ्यक्रम है इसलिए पुस्तक वितरण का प्रभावी नेटवर्क होना चाहिए ताकि छात्रों को भटकना नहीं पड़े।

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