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संस्कृत सेवा नियमों में संशोधन : एक गुट सामान्य विषय के शिक्षकों को प्रमोशन का तो दूसरा प्रमोशन नहीं देने का कर रहा विरोध

3 वर्ष पहले
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उदयपुर| प्रदेश में दो दशक बाद लागू किए गए संस्कृत सेवा नियमों को लेकर शिक्षक संघ दो गुटों में बंट गए हैं। एक संघ संस्कृत सेवा नियमों को फिर से रिव्यू कराने के पक्ष में है तो दूसरा संघ रिव्यू से खुद के हक मारे जाने की बात कह रहा है। सियाराम शिक्षक संघ और परंपरागत संस्कृत शिक्षक संघ से जुड़े पदाधिकारी सामान्य शिक्षकों को प्रिंसिपल और एचएम के पद पर पदोन्नत करने के पक्ष में नहीं है। उनका तर्क है कि सामान्य शिक्षक संस्कृत विषय से नहीं आते हैं। संस्कृत विषय वाले को ही प्रमोशन दिया जाए। राजस्थान शिक्षक संघ और सामान्य विषय शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि संस्कृत शिक्षा विभाग में 5 हजार सामान्य शिक्षक हैं। जबकि डेढ़ हजार संस्कृत विषय के शिक्षक हैं। ऐसे में सामान्य शिक्षकों को प्रमोशन नहीं दिया जाता है तो यह उनके साथ भेदभाव होगा। गौरतलब है कि करीब 40 साल बाद वर्ष 2016 में सरकार ने संस्कृत सेवा नियम को लागू किया था। इसमें सामान्य शिक्षकों को प्रिंसिपल-एचएम के योग्य नहीं माना था। सामान्य शिक्षकों के भारी विरोध पर इन्हें योग्य माना गया था। सेवा नियमों को रिव्यू करने को लेकर दो साल से लेक्चरर, एचएम और प्रिंसिपल के प्रमोशन रुके हैं। विभाग ने डीपीसी कराने की पूरी तैयार कर ली है, लेकिन नियमों में संशोधन को लेकर शिक्षकों का विरोध जारी है इस वजह से पदोन्नति प्रक्रिया अटकी हुई है।

विभाग और विद्यार्थी दोनों का नुकसान : राठौड़| राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेश उपाध्यक्ष अभयसिंह राठौड़ ने बताया कि एक ही विभाग में गुटबाजी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे विभाग और विद्यार्थी दोनों का नुकसान होगा। सामान्य शिक्षकों की संस्कृत विभाग में संख्या ज्यादा है उन्हें अगर प्रमोशन नहीं मिलेगा तो वे विभाग में क्यों रहेंगे।

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