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आज चांद दिखा तो पहला रोजा कल वरना 18 को होगा आगाज-ए-रमजान

3 वर्ष पहले
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कम्युनिटी रिपोर्टर . उदयपुर

रोजे, नमाज और दुआओं वाले पाक माह-ए-रमजान की शुरुआत गुरुवार को होगी या शुक्रवार को, इसका दारोमदार चांद के दीदार पर रहेगा। बुधवार को चांद दिखा तो ईशा की नमाज के बाद पहली तराबी पढ़ाई जाएगी और पहला रोजा गुरुवार तड़के 4.20 बजे सेहरी के साथ शुरू हो जाएगा। पहली इफ्तारी शाम 7.13 बजे होगी। रमजान के पहले ही दिन जुमेरात होगी।

अंजुमन तालीमुल इस्लाम के सदर मोहम्मद खलील और मौलाना जुलकर नैन ने बताया कि चांद का दीदार नहीं होने पर पहली तराबी गुरुवार को पढ़ी जाएगी और पहला रोजा शुक्रवार को रखा जाएगा। इस दिन तड़के 4.19 बजे सेहरी से शाम 7.13 बजे इफ्तार की जा सकेगी। शहर में अभी तापमान 41 डिग्री पार है और तेज गर्मी में भी सभी रोजे 15 घंटे से ज्यादा समय तक रखे जाएंगे। ऐलान अंजुमन तालीमुल इस्लाम की हिलाल कमेटी के मौलानाओं के हवाले से किया जाएगा। पलटन, धोली बावड़ी, मल्ला तलाई, आयड़ सहित सभी 43 मस्जिदों में इंतेजामिया कमेटियां रोजे-इफ्तार की विशेष बंदोबस्त करेंगी। मुखर्जी चौक, खांजीपीर, सिलावटवाड़ी, मल्लातलाई, धोलीबावड़ी सहित शहर के सभी मुस्लिम बहुल इलाकों में रमजान की तैयारियां हो चुकी हैं।

जानिए खासियत : खुद को हर बुरी चीज से रोकने का नाम है रमजान

मौलाना मुफ्ती बदरे-आलम और मौलाना जुलकरनैन बताते हैं कि रमजान का मतलब गुनाह जलाकर इंसान को पाक करना है। इसके लिए रोजेदार 15-15 घंटे तक बिना खाए-पीए अल्लाह की इबादत करते हैं। रमजान सुबह सादिक (सूरज निकलने से पहले) से लेकर सूरज अस्त होने तक अपने खाने-पीने समेत हर बुरी चीज से रोकने का भी नाम है। रोजे के तीन दर्जे भी हैं। पहला आम लोगों का रोजा, दूसरा खास लोगों का रोजा और तीसरा दर्जा आंख से बुरा न देखना, हाथ-पांव से बुरा न करना और पूरे शरीर को हर बुरी चीज से रोकने का नाम भी रोजा है। अगर कोई सफर में हो या फिर बीमार हो तो वह (कजा) बाद में दूसरे दिनों में भी रोजे रख सकता है।

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