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कठपुतली सामने रख बच्चों ने उकेरे चित्र, अब कार्यशाला में सीखेंगे खिलौने बनाना

3 वर्ष पहले
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उदयपुर | पारम्परिक लोक कलाओं के संरक्षण प्रोत्साहन, संकलन और प्रचार के उद्देश्य से लोक मंडल में शुक्रवार को 20 दिवसीय कठपुतली और खिलौना निर्माण कार्यशाला शुरू हुई। इसमें शहर के कई बच्चों और किशोरों ने भाग लिया। पहले दिन शाम 5 बजे से 7 बजे तक ड्राइंग पेंटिंग से कठपुतली की महत्ता बताई। प्रशिक्षक मोनिका शर्मा, भगवती लाल माली, मोहन डांगी और जीवन डांगी ने पहले खाली पेपर देकर बनी हुई कठपुतली को सामने रखा और इनके प्रकारों को समझाया। संस्था के मानद सचिव रियाज़ तहसीन ने बताया कार्यशाला में 8 साल से अधिक सभी आयु वर्ग के अभ्यर्थी भाग ले सकते हैं। सहायक निदेशक गोवर्धन सामर ने बताया कि कार्यशाला में दस्ताना, कागज से कठपुतलियां बनाने और चलाने, कठपुतली प्रदर्शन के साथ ही कागज, लकड़ी, कपड़े के खिलौने बनाने का प्रशिक्षण देंगे।

भारतीय लोक कला मंडल
बच्चों ने कहा- इस परम्परा को संजोना भी हमारा लक्ष्य : निदेशक डॉ. लईक हुसैन ने बताया कार्यशाला के पहले दिन रजिस्ट्रेशन करवाने वाले बच्चों ने कई कृतियां तैयार की। 25 साल के युवा अभिमन्यु का कहना है कि युवा आजकल इस संस्कृति से पीछे जा रहे है, इसे बचाए रखने के लिए अागे आना चाहिए जिससे इसे संजोए रखा जा सका। वही 9 साल के गौरव ने बताया कि हमारे जीवन की रोजमर्रा की जिंदगी में नया पन इस काम को करने से मिल रहा है। 11 साल की हीना और 10 साल के हर्ष का भी पहला दिन ड्राइंग सीखने में बीता।

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