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20 साल में कर चुके हैं 3.5 लाख मरीजों का निशुल्क ऑपरेशन, दवा, जांच, उपकरण सहित अटेंडेंट तक का रहना-खाना फ्री, कोई कैश काउंटर नहीं

3 वर्ष पहले
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नारायण सेवा संस्थान की ओर से 20 फरवरी 1997 को स्थापित 1100 बेड के इस अस्पताल में इन बीस वर्षों में भारत सहित पाकिस्तान, अफगानिस्तान नेपाल, बांग्लादेश, युक्रेन, यूके, यूएसए जैसे देशों के पोलियो, सेरेब्रल पाल्सी, हाथी पांव जैसी बीमारियों से ग्रसित करीब 3.5 लाख मरीजों का निशुल्क उपचार कर उन्हें जीवनदान दिया गया है। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ सहित करीब 125 लोगों की टीम हर रोज 95 से ज्यादा ऑपरेशन करती है। उदयपुर में बड़ी गांव और सेक्टर 4 में स्थित इन अस्पतालों में हर वक्त करीब 1000 से अधिक मरीज भर्ती रहते हैं। खासबात ये है कि इस अस्पताल में एक्सरे-सोनोग्राफी से लेकर एमआरआई जैसी बड़ी से बड़ी जांच सहित दवा या अन्य किसी भी सुविधा या सेवा के लिए यहां कोई कैश काउंटर नहीं है। यहां मरीजों के ऑपरेशन, दवा सहित तमाम इलाज से लेकर उनके साथ आने वाले परिजनों तक के लिए खाने-पीने, रहने सहित सभी सुविधाएं निशुल्क हैं। यहां एक वक्त में करीब 4000 से अधिक लोग खाना खाते हैं। मरीजों के फीजियोथैरेपी, कैलिपर्स, मॉड्यूलर इक्यूपमेंट, ट्राइसाइकिल, व्हील चेयर सहित अन्य उपकरण तक का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल बताते हैं कि ब्लड कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट, दिल में छेद जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त रोगियों का इलाज संस्थान दूसरे अस्पताल में अपने खर्चे पर कराता है। संस्थान हर साल 25 हजार कैलिपर्स और 11 हजार मोड्यूलर कृत्रिम अंग बांटता है। वहीं अब तक 7,95,678 व्हील चेयर और 2,59,768 ट्राई साइकिल निशुल्क बांटी जा चुकी है। मरीजों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यहां कम्प्यूटर कोर्स, मोबाइल रिपेयरिंग, सिलाई-कढ़ाई सहित अन्य रोजगारपरक वोकेशनल ट्रेनिंग भी निशुल्क दी जाती है। मरीज के ठीक होने के बाद उन्हें जॉब प्लेसमेंट भी दिलाया जाता है। खुद का रोजगार करने वालों को टूल किट, सिलाई मशीन जैसे उपकरण निशुल्क दिए जाते हैं।

ऑपरेशन के लिए चल रही है दिसंबर 2019 की वेटिंग
देश-दुनिया से बड़ी तादात में अस्पताल पहुंच रहे रोगियों के लिए ऑपरेशन की वेटिंग लिस्ट फिलहाल 18 दिसंबर 2019 तक बताई जा रही है। खास बात यह है कि देशभर से शहर पहुंचने वाले मरीजों को लाने- ले जाने के लिए अस्पताल की एंबुलेंस रेलवे स्टेशन-अस्पताल पर तैनात रहती हैं।

एक मुट्ठी अनाज से हुई थी संस्थान की स्थापना
उदयपुर. नारायण सेवा संस्थान के अस्पताल में भर्ती मरीज।

संस्थान की स्थापना 1985 में संस्थापक चेयरमैन कैलाश ‘मानव’ ने घर-घर से एक-एक मुट्ठी आटा एकत्रित कर की थी। तब से अस्पताल का खर्च दानदाता व्यय करते आ रहे हैं। प्रशांत अग्रवाल बताते हैं कि संस्थान अब तक 30 सामूहिक विवाह समारोहों के माध्यम से 1500 से अधिक दिव्यांग जोड़ों को परिणय सूत्र में बांध चुका है। वहीं दिव्यांगों के लिए नेशनल स्वीमिंग कॉम्पीटिशन, फैशन और टेलेंट शो जैसे आयोजन भी करवा रहा है।

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