एमबी अस्पताल की इमरजेंसी में सोमवार रात करीब 12 बजे नाटकीय घटना क्रम के बाद नवजात बालिका मिली। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि किसी महिला-पुरुष के साथ आई 18 साल की युवती इस बच्ची को जन्म देकर 10 मिनट में कहीं चली गई, जबकि अस्पताल प्रशासन और चिकित्सक प्रसव से इनकार कर रहे हैं। हालात ऐसे बने कि नवजात को देर रात तक कोई ठौर नहीं मिल पाया। बताया गया कि रात 11:53 बजे पिंकी नाम की युवती इमरजेंसी में पहुंची। साथ आए महिला-पुरुष ने उसे पेट दर्द की शिकायत बताकर पर्दे के पीछे लेटा दिया। डॉक्टरों और स्टाफ को पिंकी के कपड़े बदलने की जानकारी देते हुए दूर कर दिया। करीब 10 मिनट बाद सबके सामने से युवती समेत तीनों इमरजेंसी से कहीं चले गए, जो देर तक नहीं लौटे। इधर, नवजात की किलकारी सुनकर डॉक्टर और कर्मचारी चौंक गए। देखा तो पर्दे के पीछे नवजात बच्ची थी। यह देख हड़कंप मच गया। ड्यूटी दे रहे तीनों होमगार्ड जवान बाहर तक दौड़े, लेकिन न युवती का पता लगा, न उसके साथ आने वालों का। देर रात स्टाफ नवजात को बाल चिकित्सालय की नर्सरी में ले गया, जहां से पालनागृह में ले जाने की तैयारी की गई।
सीसीटीवी से निगरानी और सुरक्षा के दावे फिर फेल
अस्पताल परिसर में सीसी टीवी कैमरे से निगरानी और माकूल सुरक्षा के दावे फिर फेल हो गए। गत 6 मई को बाल चिकित्सालय से नवजात के अपहरण की घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त का भरोसा भी दिलाया था, लेकिन बीती रात की घटना ने इस आश्वासन की हकीकत भी सामने ला दी। घटनाक्रम काे लेकर अस्पताल प्रबंधन ने सफाई दी है कि प्रसव इमरजेंसी में नहीं हुआ।
प्रसव इमरजेंसी में नहीं हुआ, नवजात को छोड़ गए थे
महिला बच्ची को कपड़ों में छिपाकर अस्पताल लाई थी। कपड़े बदलने के बहाने नवजात को इमरजेंसी में छोड़ दिया गया। अगर प्रसव यहीं हुआ होता तो नवजात की नाल कटी नहीं होती और ब्लीडिंग भी काफी मात्रा में होती। जबकि खून के निशान कम ही मिले हैं।
डॉ. तरुण दवे, चिकित्सा अधिकारी, इमरजेंसी यूनिट, एमबी अस्पताल