उदयपुर| जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक श्रीसंघ के साझे में जिनमणि सुरिश्वर के आचार्य बनने के बाद झीलों की नगरी में पहली बार आगमन पर शोभायात्रा के साथ आराधना भवन लाया गया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य ने कहा कि सुखी और सार्थक इन दोनों शब्दों की व्याख्या समझें, सहयोग की भावना से ही समाज आगे बढ़ता है। मेवाड़ की धरती का कण कण हमारे पूर्वज आचार्य भगवंतों की साधना भूमि रही है।