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स्मृति संगोष्ठी : प्रो. आलम शाह का लेखन आज भी प्रासंगिक है

3 वर्ष पहले
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उदयपुर| प्रो. आलम शाह खान की 15वीं पुण्यतिथि पर गुरुवार को माणिक्य लाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में स्मृति संगोष्ठी हुई।

अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार आबिद अदीब ने कहा कि प्रो. खान प्रगतिशील चेतना के रचनाकार थे। उनके लेखन में समाज के वंचित एवं शोषित वर्ग की पीड़ा को उजागर किया गया है। आज जब मानवता पर खतरा मंडरा रहा है व सारे जनतांत्रिक मूल्य भुलाए जा रहे हैं, तब खान का लेखन और भी प्रासंगिक हो जाता है। इस मौके पर प्रो. आलम शाह खान की बेटी डॉ. तराना परवीन ने खान के समग्र लेखन के प्रकाशन प्रस्तावित किया। सुविवि दर्शनशास्त्र की विभागाध्यक्ष प्रो. सुधा चौधरी ने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय के प्राध्यापक और अन्य कर्मचारियों के संस्मरण संकलित कर प्रकाशन किया जाना चाहिए। जनवादी मजदूर यूनियन के संस्थापक डी.एस. पालीवाल, प्रो. हेमेंद्र चंडालिया ने भी विचार रखे। आबिद अदीब के प्रस्ताव पर उनकी अध्यक्षता में समिति बनाई गई, जिसमें प्रो. हिमांशु पंड्या, प्रो. पल्लव, प्रो. चौधरी, प्रो. चंडालिया एवं प्रो. तराना को शामिल किया गया।

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