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पहाड़ियों-पेड़ों पर गरुड़ और मधुमक्खियां करती हैं दुश्मनों से एक-दूसरे की रक्षा

3 वर्ष पहले
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लकी जैन . उदयपुर | प्रकृति में दो बिलकुल अलग व्यवहार की प्रजातियों का एक-दूसरे की रक्षा का एक रोचक उदाहरण सामने आया है। इसमें बोनेलीज ईगल (गरुड़) और मधुमक्खियां एक-दूसरे की इनके दुश्मनों से रक्षा करते हैं और अक्सर एक ही पेड़ पर घोंसले और छत्ते बनाते हैं। सीतामाता अभयारण्य की पहाड़ियों पर लगे पेड़ों सहित प्रतापगढ़ के भंवर सेमला, छोटा मजेसरिया, मनोहरगढ़, लालपुरा, शाहजी का पठार क्षेत्रों में बोनेलीज के घोंसले और मधुमक्खियों के छत्तों को अक्सर एक ही पेड़ पर देखा गया है। पक्षी-प्रकृति विशेषज्ञ देवेन्द्र मिस्त्री ने बताया कि गरुड़ शिकारी पक्षी होता है और बंदर के बच्चे या मुर्गियों को उठा कर ले जाता है। ऐसे में बंदर या मुर्गी पालन करने वाले लोग इनके घोंसलों को तोड़ देते हैं। लेकिन देखा गया कि जिन पेड़ों पर गरुड़ के घोंसलों के साथ मधुमक्खी के छत्ते थे और किसी इंसान ने पेड़ पर चढ़कर घोंसलों को तोड़ने का प्रयास किया तो मधुमक्खियों ने एक साथ हमला कर इंसान और बंदर को वहां से भागने पर मजबूर कर दिया। वहीं मधु खाने वाला ओरिएंटल हनी बजर्ड (मधु खाने वाला बाज) ने मधुमक्खियों के छत्ते को तोड़ने के लिए हमला किया तो गरुड़ ने उस पर हमला कर उसे छत्तों से दूर कर दिया।

मधुमक्खियां गरुड़ के घोंसले तोड़ने आने वाले इंसान या बंदर पर हमला कर भगा देती हैं, तो गरुड़ मधु खाने के लिए छत्ते को तोड़ने वाले वाले बाज पर हमला कर उसे छत्ते से दूर कर देता है...

मधुमक्खी के छत्ते के पास गरुड़।

भंवर सेमला में लगे पीपल के पेड़ पर गरुड़ के घोंसले और मधुमक्खियों के छत्ते

पक्षी विशेषज्ञ देवेन्द्र मिस्त्री ने बताया कि वे पिछले 10 वर्षों से इन क्षेत्रों में जा रहे हैं। खासकर भंवर सेमला गांव में पीपल के पांच घने पेड़ देखे, जिनकर गरुड़ के घोंसलों के साथ ही मधुमक्खियों के छत्ते भी थे। यहां अक्सर ये एक-दूसरे की दुश्मन से रक्षा करते दिखाई दिए। खेती, आंधी और कटाई के चलते चार पेड़ खत्म हो चुके हैं और अभी सिर्फ एक ही पेड़ बचा है। मधुमक्खियों और गरुड़ के आपसी सहयोग को इस पेड़ पर देखा जा सकता है कि किस प्रकार ये दोनों प्रजातियां इनके दुश्मन से एक-दूसरे की रक्षा करती हैं। सीतामाता अभयारण्यों की पहाड़ियों पर लगे पेड़ों पर यह सामंजस्य दिखता है।

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