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स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 : परिणाम में उदयपुर का कहीं नाम नहीं

3 वर्ष पहले
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स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 के परिणाम बुधवार को घोषित कर दिए गए। केन्द्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप पुरी ने राष्ट्रीय स्तर के कुल 23 और जोनल स्तर के 20 अवार्ड घोषित किए। इसमें उदयपुर शहर का नाम नहीं हैं। इंदौर एक बार फिर देश का सबसे स्वच्छ शहर चुना गया हैं। मंत्रालय आने वाले दिनों में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले शहरों के नाम भी घोषित करेगा।

शहरी विकास मंत्रालय के नेशनल अवार्ड में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की केटेगरी में कोटा सिटीजन फीडबैक के बेस्ट शहरों में चुना गया हैं। देश में सबसे ज्यादा प्रगति करने वाली राजधानी का खिताब जयपुर के नाम रहा। स्मार्ट सिटी में शामिल होने के बावजूद स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में उदयपुर का किसी केटेगरी में शामिल नहीं होने से कई सवाल खड़े होते हैं। इस परिणाम ने निगम के सामने एक चुनौती फिर भी खड़ी कर दी हैं। निगम के साथ ही शहरवासियों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई हैं।

एक नजर स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 पर : 2700 की टीम ने लिया 40 करोड़ लोगों से जुड़े निकायाें में फीडबैक

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के सहयोग से केन्द्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 के तहत 4203 शहरी स्थानीय निकायों का मूल्यांकन किया था। 2700 लोगों की टीम ने पूरे देश के 40 करोड़ लोगों से संबंधित स्थानीय निकायों का सर्वेक्षण किया जो कि 4 जनवरी 2018 से 10 मार्च 2018 तक चला। स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 के दौरान 53.58 लाख स्वच्छता ऐप डाउनलोड किये गये और 37.66 लाख नागरिकों से फीडबैक लिया गया। इससे पहले 2017 में 434 नगरों में स्वच्छता सर्वेक्षण का संचालन किया गया था जिसमें इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर चुना गया। जबकि 2016 में 73 नगरों में स्वच्छता सर्वेक्षण हुआ उसमें मैसूर को सबसे साफ-सुधरा शहर चुना गया था।

कॉलोनियों, बस्तियों, पुराना शहर, और व्यवस्थित बसा क्षेत्र साफ है या नहींω

हकीकत : तमाम कोशिशों के बावजूद सफाई के मामले में हम कमजोर रहे। सर्वेक्षण के दौरान भी कई क्षेत्रों में दोपहर तक कंटेनर भरे नजर आते थे।

महिला और पुलिस-पब्लिक और कम्युनिटी टॉयलेट। क्या इन्हें बच्चे भी इस्तेमाल कर सकते हैंω

हकीकत : शहर की आबादी और यहां आने वाली देशी-विदेशी महिलाओं के मुकाबले महिला टॉयलेट की व्यवस्था नाम मात्र की हैं।

टॉयलेट की सफाई, ड्रेनेज सिस्टम, रोशनदान, पानी लाइट के इंतजाम कैसा हैω

निगम दफ्तर से कुछ ही मीटर की दूरी पर बैंक तिराहा कॉर्नर पर बने पब्लिक टॉयलेट के बाहर आए दिन गंदगी फैली रहती है। इससे शहर के दूसरे पब्लिक टॉयलेट का अंदाजा लगाया जा सकता हैं।

टॉयलेट में स्वच्छ भारत मिशन के संदेश वाले होर्डिंग, बैनर, वॉल पेंटिंगω

हकीकत : इस मामले में निगम ने कुछ प्रयास जरूर किए।

मुख्य स्टेशन पर रेलवे ट्रैक या प्लेटफॉर्म के आसपास 500 मीटर क्षेत्र में कहीं खुले में शौच तो नहीं की जा रहीω

हकीकत : सिटी रेलवे स्टेशन के ठीक बाहर आसपास के क्षेत्र में अब भी लोग खुले में शौच करते देखे जा सकते हैं।

शहर में लगे डस्ट बीन के बारे में जानकारी और उसके इस्तेमाल को लेकर जागरुकताω

हकीकत : बापू बाजार जैसे मुख्य बाजार में निगम के लगाए डस्ट बीन को कुछ ही दुकानदारों के उखाड़ फेंके।

सर्वे के मुख्य बिंदु और हम यहां रहे कमजाेर

सर्वेक्षण के ये थे आधार

मंत्रालय ने स्वतंत्र एजेंसी ने सर्वेक्षण करवाया था। तीन स्रोतों से आंकड़े जुटाये गये। उसमें सेवा स्तर में हुई प्रगति, प्रत्यक्ष निरीक्षण और नागरिकों का फीडबैक शामिल था। इसकी के तहत सर्वे टीम उदयपुर भी अाई थी।

स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 के परिणाम आने की अभी डिटेल जानकारी नहीं मिली हैं। डिटेल देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। चंद्रसिंह कोठारी, मेयर, उदयपुर

स्वच्छता सर्वेक्षण 2अभी फूल रैंकिंग नहीं आई हैं। रैंकिंग का पता लगने के बाद ही उदयपुर को लेकर कुछ कहा जा सकेगा। सिद्धार्थ सिहाग, आयुक्त, नगर निगम

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