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आमरण अनशन खत्म करने पर चपलोत के पोस्टर फाड़े कालिख पोती, कहा- आधी रात मेवाड़ के साथ धोखा हुआ

3 वर्ष पहले
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हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील शांतिलाल चपलोत का आमरण अनशन खत्म होने के बाद आंदोलन से जुड़े वकील दो गुट में बंट गए हैं। एक गुट आमरण अनशन खत्म करने के पक्ष में था, तो दूसरे ने सुबह कोर्ट पहुंचकर इसका विरोध जताया। गुस्साए वकीलों ने शांतिलाल चपलोत के कोर्ट चौराहे और कोर्ट द्वार पर लगे पोस्टर पर कालिख पोत दी और पोस्टर फाड़ डाले। आमरण अनशन खत्म करने पर शांतिलाल चपलोत ने कहा हां, यह सही है कि 15 मई को तय हो गया था कि मुख्यमंत्री 19 मई को मिलने बुला रही हैं, लेकिन उनकी ओर से कोई लिखित निमंत्रण नहीं था। मैंने 16 मई से ही आमरण अनशन पर बैठने की घोषणा कर दी थी, तो मैं बैठा। मैं कायर नहीं हूं कि पीछे हट जाता। गुरुवार रात साढ़े आठ बजे गुलाब चंद कटारिया और रात 11 बजे कृपलानी से मेरी फोन पर बात हुई थी, तब भी मैंने इन्हें आमरण अनशन खत्म करने से इनकार किया था। इसके बाद कृपलानी ने वकीलों के दल को वार्ता के लिए सर्किट हाउस बुलाया था। कृपलानी से रात 1 बजे मुलाकात करने गए बार एसोसिएशन अध्यक्ष रामकृपा, महासचिव चेतनपुरी गोस्वामी, हाईकोर्ट बेंच संघर्ष समिति के रमेश नंदवाना, शांतिलाल पामेचा और रोशनलाल अनशन खत्म करने का निर्णय करके लाैटे थे। दल ने मुझे आमरण अनशन खत्म करने के लिए कहा। यह आंदोलन मेरे अकेले का नहीं था। वकीलों के दल ने निर्णय कर लिया था, इसलिए मैं आमरण अनशन खत्म करने के लिए तैयार हुआ। चपलोत ने कहा मैं जितना कर सकता था, किया।

सीएम की शर्त थी कि वार्ता चपलोत के नेतृत्व में ही होगी, इनके बिना कैसे जाते : रामकृपा शर्मा

बार एसोसिएशन अध्यक्ष राम कृपा शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने यह शर्त रखी थी कि बेंच को लेकर वार्ता चपलोत साब के नेतृत्व में ही होगी। उनकी शारीरिक स्थिति बिगड़ रही थी, उनको अनशन में जयपुर लेकर जाना संभव नहीं था। हमारा उद्देश्य आंदोलन करना नहीं, बल्कि सकारात्मक परिणाम प्राप्त करना है। श्रीचंद कृपलानी से हुई वार्ता में सरकार की ओर से सकारात्मक बात नजर आई तो हमने यह पहल की। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए चपलोत साब का आमरण अनशन खत्म करवाने का निर्णय दल ने लिया था।

क्रमिक अनशन हुआ, कुछ ने कार्य बहिष्कार नहीं किया : आंदोलन के तहत कोर्ट के मुख्य द्वार पर वकीलों ने क्रमिक अनशन किया और न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया। हालांकि कुछ वकीलों के वाट्सएप ग्रुप और आपसी बातचीत में चर्चा रही कि वे कार्य बहिष्कार को समर्थन नहीं देंगे। जब आंदोलन खत्म करने की रणनीति में उनको साथ नहीं लिया गया और रातों रात अनशन खत्म करवाया गया तो अब समर्थन के लिए कुछ नहीं बचता है।

राजनीतिक फायदे के लिए किया

जिस तरह आंदोलन का पटाक्षेप हुआ है, इससे अधिवक्ताओं का आंदोलन के प्रति विश्वास टूटा है। कल रात को जो हुआ वह राजनीतिक ड्रामा लगा, ऐसा लगा यह सब राजनीतिक फायदे के लिए किया गया। इसको लेकर वकीलों में भारी रोष है। -राजेश सिंघवी, अधिवक्ता

रात में हुआ वह मेवाड़ के साथ धोखा

रात को जो भी हुआ गलत हुआ। राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने युवा अधिवक्ताओं का उपयोग किया। इन्हें चढ़ाकर आंदोलन को बढ़ाया और स्वार्थ पूरा होने पर दो दिन में ही पीछे हट गए। यह मेवाड़ की जनता और अधिवक्ताओं के साथ धोखा है। -कन्हैयालाल टांक, अधिवक्ता

अनशन पर बैठना ही नहीं था फिर

रात को इस तरह से आमरण अनशन खत्म करने पर सभी युवा अधिवक्ता नाराज हैं। अनशन खत्म करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए थी। जब ये 19 मई का इंतजार नहीं कर सकते थे तो इन्हें आमरण अनशन पर बैठना ही नहीं चाहिए था। -देवेन्द्र सिंह झाला, अधिवक्ता

उदयपुर. हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अनशन करते हुए वकील और संगठन (बाएं)। शांतिलाल चपलोत के बैनर पर पोती कालिख।

11 सदस्यीय दल के साथ आज मुख्यमंत्री की होगी बैठक : शनिवार को मुख्यमंत्री के साथ वकीलों के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक संघर्ष समिति के संयोजक शांतिलाल चपलोत के नेतृत्व में होगी। समिति अध्यक्ष रमेश नंदवाना ने बताया शांतिलाल पामेचा, वकील रमेश नंदवाना, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामकृपाल शर्मा, महासचिव चेतन पुरी गोस्वामी, चित्तौड़ के वरिष्ठ अधिवक्ता कन्यालाल श्रीमाली, बार एसोसिएशन उदयपुर के पूर्व अध्यक्ष प्रवीण खंडेलवाल सहित 11 पदाधिकारी भी जाएंगे।

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