नैक से ए ग्रेड प्राप्त सुखाडिय़ा यूनिवर्सिटी के परीक्षकों का हाल बुरा है। यूनिवर्सिटी के परीक्षक जो छात्रों की कॉपियां जांचते हैं उनकी जांच में इस कदर त्रुटि है कि पिछले दो साल में जिन छात्रों ने विवि की जांच पर सवाल उठाए हैं उनमें से 77.48 प्रतिशत का अंदेशा सही निकला है। यानी पिछले दो वर्ष में पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने वाले छात्रों में से 77.48 प्रतिशत का परिणाम पुनर्मूल्यांकन के बाद बदला है। इसका खुलासा सूचना के अधिकार के तहत मिली सूचना से हुआ है। अधिवक्ता सुधीर जारोली की लगाई आरटीआई में यह भी सामने आया है कि इस पुनर्मूल्यांकन के लिए विवि छात्रों से मोटी रकम भी वसूलता है। विवि में पिछले तीन साल में कुल 46978 आवेदन पुनर्मूल्यांकन के लिए किए गए। इनमें से पिछले दो साल में 32469 आवेदन किए गए। 25157 आवेदनों में छात्र का परिणाम बदला। यानी 77.48 प्रतिशत परिणाम बदले गए। वहीं वर्ष 2015-16 में बदलाव का प्रतिशत 76.61 रहा तो 2016 में यह बढ़कर 78.26 चला गया। ऐसे में 75 प्रतिशत से ज्यादा परिणाम बदलने से यह स्पष्ट होता है कि यूनिवर्सिटी के परीक्षक किस तरह छात्रों की कॉपियां जांचते हैं। उच्च शिक्षा के जानकारों का तो यह भी कहना है कि इनमें ज्यादातर छात्र वो होते हैं जिन्हें या तो फेल कर दिया जाता है या फिर बैक होती है, वहीं ऐसे कई हजारों छात्र होते होंगे जिनकी कॉपियां लापरवाही से जांची जाती होगी मगर ठीक ठाक अंक होने के कारण वो पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन नहीं करते।
3 साल में परीक्षकों को भी 20 लाख 2 हजार 985 रुपए भुगतान किया
विवि पुनर्मूल्यांकन के माध्यम से बड़ी रकम छात्रों से वसूलता है। विवि ने पिछले तीन साल में छात्रों से 3 करोड़ 62 लाख 700 रुपए वसूले हैं। प्रेाफेशनल कोर्स के लिए विवि के पुनर्मूल्यांकन की फीस 1250 रुपए होती थी, जिसे कुछ दिन पूर्व ही विवि ने घटाकर 450 रुपए किया है। वहीं इस फीस से परीक्षकों को भी पूरा भुगतान नहीं किया गया है। तीन साल में परीक्षकों को सिर्फ 20 लाख 2 हजार 985 रुपए भुगतान किया गया है।
परिणामों की यह है स्थिति
वर्ष पुनर्मूल्यांकन के आवेदन परिणाम बदला फीस वसूली
2014-15 14509 जानकारी नहीं 81,72,810
2015-16 15451 11838 106,82,890
2016 17018 13319 117,65,000
3 साल 46978 25157 3,62,00,700