आरएनटी में मोबाइल और ईमेल पर भी मिलेगी एक्स-रे की रिपोर्ट, जूम कर देख सकेंगे
संभाग के सबसे बड़े एमबी अस्पताल में अब मरीजों को एक्स-रे की डिजिटल रिपोर्ट दी जाएगी। कम्प्यूटर और मोबाइल पर भी कई एंगल से ये रिपोर्ट जूम कर के साफ-साफ देख सकेंगे। इसके लिए ट्रोमा में स्थापित डिजिटल एक्स-रे मशीन को एचडीएमआई (आई डेफिनेशन मल्टीमीडिया इंटरफेस) केबल से जोड़ दिया गया है। फिलहाल अर्थोपेडिक और न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉक्टरों के कम्प्यूटर पर यह सुविधा मुहैया कराई जाएगी। एमबी अधीक्षक डॉ. विनय जोशी ने बताया कि इसके बाद सीटी स्कैन, एमआरआई, एंजियोग्राफी, कलर डॉप्लर, ईकोकार्डियोग्राफी, सोनोग्राफी, ओपीजी और मेमोग्राफी रिपोर्ट भी एमबी-बाल चिकित्सालय और जनाना अस्पताल के ओटी, आईसीयू, महत्वपूर्ण विभागों के ओपीडी, वार्ड, डॉक्टर्स चैंबर और लेबररूम में ऑनलाइन देखने की सुविधा शुरू कर दी जाएगी।
खास बात यह है कि डिजिटल फ्रेंडली 60-70 फीसदी मरीजों को उनकी ये रिपोर्ट ईमेल पर भी दी जाएगी। इससे अस्पताल प्रशासन को हर माह करीब तीन करोड़ रुपए बचेंगे, क्योंकि रोज करीब 1.37 लाख रुपए इन जांचों पर खर्च होते हैं।
एक्स-रे रिपोर्ट को गहराई से पढ़ सकेंगे डॉक्टर, इलाज अच्छा मिलेगा, एमबी के हर माह 3 करोड़ बचेंगे
कहां कितने सिस्टम पर डिजिटल रिपोर्ट
उपचार केंद्र एमबी जनाना
ओटी 11 05
आईसीयू 11 02
ओपीडी 20 02
वार्ड 60 06
डॉक्टर्स चैंबर 20 05
लेबररूम 00 01
आंकड़े अस्पताल प्रशासन के अनुसार।
एमबी-जनाना में रोज की जांचें और खर्च
जांच संख्या खर्च
एक्स-रे 2000 80000
सीटी स्कैन 50 15000
कलर डॉप्लर 15 3000
एमआरआई 30 12000
ईकोकार्डियोग्राफी 15 3000
सोनोग्राफी 200 20000
ओपीजी 10 1000
मेमोग्राफी 30 3000
कुल खर्च 1,37,000 रुपए
सिस्टम ऐसा होगा... मरीज के आने से पहले डॉक्टर के पास पहुंच जाएगी रिपोर्ट
एमबी हॉस्पिटल के उपाधीक्षक डॉ. रमेश जोशी ने बताया कि सभी जांचों के डिजिटलाइजेशन को पैक्स एंड डायकोम कहते हैं। डॉक्टर ओटी में मरीज का ऑपरेशन करते समय ऑपरेशन के बिंदुओं को जूम कर आसानी से देख सकेगा। जांचें कॉमन प्लेटफार्म से संबंधित विभाग के डॉक्टर के पास मरीज के आने से पहले ही पहुंच जाएंगी। हालांकि इस व्यवस्था का लागू होने में अभी समय लगेगा। डॉ. जोशी ने बताया कि ट्रोमा सेंटर की हाईटेक डीआर मशीन एक ही बार में और एक से दो मिनिट में ही 10 तरह की गहराइयों के एक्स-रे कर देती है। डॉक्टरों को एक्स-रे की विरियम स्टडी समझने में काफी मदद मिलेगी।
जांच जानिए अस्पताल में किस एक्सरे मशीन का क्या है काम
एक्स-रे हड्डियों के फ्रेक्चर, फेफड़े, किडनी आदि बीमारियों का पता लगाने।
सीटी स्कैन एक्सीडेंट-कैंसर के मामलों का सटीक पता लगाने।
कलर डॉप्लर गर्भस्थ शिशु के रक्त संचार, जन्मजात विकृतियों, रक्त वाहिकाओं की बनावट की जानकारी प्राप्त करने में इस मशीन का प्रयोग किया जाता है।
एमआरआई पूरे शरीर की बारीकी से जांच करने में इस मशीन का प्रयोग होता है।
ईकोकार्डियोग्राफी ह्रदय की बनावट और संचालन का पता लगाने में इसका प्रयोग होता है।
सोनोग्राफी पेट की जांचे, गर्भस्थ शिशु की उम्र, जन्मजात विकृति का पता लगाने में।
ओपीजी जबड़े के फ्रेक्चर और विकृतियों का पता लगाने में इसका प्रयोग होता है।
मेमोग्राफी ब्रेस्ट-स्तन कैंसर का पता लगाने के लिए मेमोग्राफी मशीन का प्रयोग होता।