इंद्रपुरा. गोपीनाथजी के मंदिर से कलश यात्रा निकालती महिलाएं।
भास्कर न्यूज | इंद्रपुरा
बागोरा में नव कुंडीय नव दिवसीय श्रीराम महायज्ञ के लिए महिलाओं ने गोपीनाथजी मंदिर से सीताराम आश्रम बालाजी धाम शीतला जोहड़ तक कलश यात्रा निकाली। बालाजी धाम पर रामदासजी महाराज के सानिध्य में जन कल्याणार्थ नवकुंडीय श्रीराम महायज्ञ का आयोजन किया गया है। यज्ञाचार्य पंडित केदार शर्मा बागरियाबास सीकर ने यज्ञ में आहुति दी। यज्ञशाला में साधुराम, मदनलाल, भोलूराम, पन्नालाल सैनी, लक्ष्मणसिंह, सुंडाराम, सांवरमल सैनी, रूड़मल, छोटूराम ने आहुतियां दी। अवधेशदासजी महाराज हालूहाला, भरतदासजी महाराज बुरलाधाम, रघुनाथदासजी महाराज आदि उपस्थित थे।
मंड्रेला | चंपावत शक्ति माता मंदिर में शनिवार को भागवत कथा से पूर्व कलश यात्रा निकाली गई। शनिवार को प्रथम दिन कथावाचक हेतराम पाठक महाराज ने कहा कि भागवत कथा सुनने मात्र से मनुष्य का कल्याण संभव है। इससे पूर्व सुबह बैंडबाजे के साथ दौलत महल से कस्बे के मुख्य मार्गों से 101 महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। फूलों से स्वागत किया गया। कथावाचक बृजधाम वृंदावन के कथावाचक हेतराम पाठक, शंकरशरण पोलीवाल, लालजी रूंगटा, रवि पुरोहित, सुशील उपस्थित थे।
उधर, गायत्री शक्तिपीठ में चल रही भागवत कथा में व्यासपीठ से कथावाचक कांतिप्रसाद रूंगटा ने कहा कि कलियुग में भगवान का भजन करने मात्र से मनुष्य का कल्याण होते हैं। वह भगवान का ध्यान करे जिससे संसार के चक्र से मुक्ति मिल सके।
धर्म
उदयपुरवाटी क्षेत्र के बागोरा, मंड्रेला व इस्लामपुर में धार्मिक आयोजन शुरू
कृष्ण-सुदामा जैसी दोस्ती ना देखी और ना देखेंगे : श्रीजी लक्ष्मी देवी
खेतड़ी. श्रीकृष्ण नगर बड़ाऊ में कांकड़ वाले बालाजी सेवा समिति के तत्वावधान में चल रही भागवत कथा के सातवें दिन श्रीजी लक्ष्मी देवी ने कहा ने कहा कि दोस्ती करनी है तो ऐसी करो जिसे जमाना याद रखे। भगवान कृष्ण-सुदामा की दोस्ती आज भी किसी से छुपी नहीं हैं। दोस्त के दुख-दर्द में सहयोग करना चाहिए। भगवान कृष्ण ने अपनी दोस्ती के लिए सब कुछ न्यौछावर कर दिया था। इस दौरान सजीव झांकी सजाई गई। कथा के समापन पर ग्रामीणों ने भंडारे का आयोजन किया गया। श्रीकृष्ण नगर में नवयुवक मंडल का गठन किया गया। मंडल ने मंदिर परिसर में पौधरोपण का संकल्प लिया। कार्यकर्ता गांव की सफाई में भी अपना योगदान देंगे। कथा में महेंद्रपाल शर्मा, मुकेश शर्मा, प्रह्लाद शर्मा, महावीरप्रसाद यादव, श्योराम यादव, मास्टर केशर देव, पालाराम, फूलचंद शर्मा, गोरधन जांगिड़, सुलोचना शर्मा आदि श्रद्धालु उपस्थित थे।
कलश यात्रा निकाली, भागवत कथा शुरू
इस्लामपुर. हरिराम परसरामका निवास पर शनिवार को भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ की शुरुआत कलश यात्रा निकालने के बाद हुई। कलश यात्रा मुख्य बाजार स्थित बड़े मंदिर से शुरू होकर सुनारों के मोहल्ले व चूणा चौक से होती हुई कथा स्थल पहुंची। कथावाचक पं. बृजभूषण शास्त्री ने कथा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि कथा सुनने से मनुष्य के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आयोजक मोहनलाल गुप्ता ने बताया कि कथा का वाचन प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 4 बजे तक होगा। समापन 26 मई को हवन व भंडारे के साथ होगा। इस अवसर पर सज्जन खेतान, रामगोपाल शर्मा, प्रमोद खेतान, सज्जन जांगिड़, मुकेश गुप्ता मौजूद थे।
जब-जब धरती पर पाप बढ़ा, भगवान ने अवतार लिया : महाराज साईंराम
बाघोली / चंवरा. मोरिंडा धाम पलटूदास अखाड़ा स्थित पंचमुखी बालाजी धाम में कथा के तीसरे दिन शनिवार को साईंराम महाराज ने कहा कि जब-जब धरती पर पाप बढ़ा, तब-तब भगवान ने अवतार लेकर पापों का नाश किया। पुरा समय में राक्षस देवताओं को परेशान करते थे। भगवान ने अवतार लेकर राक्षसों का विनाश कर देवी-देवताओं को छुटकारा दिलाया। कथा में कंस वध, ध्रुव अवतार आदि की कथाओं का वर्णन किया गया। संगीतमयी भजनों में महिलाओं ने नृत्य किया। इस दौरान गजराज सिंह, सांवरमल सैनी, छाजूराम, विलास राम, पूर्व सरपंच बिमला मीणा, मीना शर्मा, मन्नीदेवी, मक्खनदास, राकेश सैनी, राधेश्याम सैनी, राधेश्याम कुमावत, मालीराम सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
भागवत का आयोजन करवाने से जन्मान्तर के चक्र से मुक्ति संभव : जटाशंकर
बुगाला. कथा वाचक जटाशंकर अनुज ने कहा कि कलयुग में भागवत कथा ही मोक्ष का द्वार है। इसकी रचना वेदव्यास ने मानव मात्र के कल्याण के लिए की। इन्होंने कहा कि कथा सुनने व आयोजन करवाने वाले जन्म जन्मांतर के चक्र से छूट कर मोक्ष प्राप्त करते हैं। वे शनिवार को वीरम नगर अजाड़ी कलां गांव के झूंथाराम सुआदेवी जांगिड़ गेस्ट हाउस में भागवत कथा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भागवत कथा मोक्षदायनी है। इसका श्रवण करने से सात दिन में राजा परीक्षित तर गए थे। भगवान को प्रेम व भक्ति से ही पाया जा सकता है। इससे पूर्व कलश यात्रा निकाली गई।
इस्लामपुर. कलशयात्रा में शामिल महिलाएं।
खेतड़ी. भागवत कथा के समापन पर भागवत को सिर पर धारण कर ले जाते यजमान।
मंड्रेला. कथा से पहले कलश यात्रा में शामिल महिलाएं।