दुष्कर्म से गर्भवती हुई छात्रा के परिजन को दबंगों का खौफ
भैरवगढ़ थाना क्षेत्र के गुनावा गांव की 16 साल की नाबालिग बालिका से दुष्कर्म को 8 माह बीत चुके हैं। घटना के 6 माह बाद जनवरी में बालिका के गर्भवती होने का पता चला तो पूरे परिवार की रातों की नींद उड़ गई। लड़की ने इसके लिए जिसे जिम्मेदार बताया वो गांव का दबंग है, उनके खिलाफ बाेल भी नहीं सकते। ऐसे में परिवार ने चुप्पी साध ली लेकिन किसी ने डाॅयल-100 पर फोन किया। अधिकारियों ने पूरी बात पूछी और मदद का आश्वासन दिया। डरते झिझकते रिपोर्ट दर्ज कराई लेकिन इसके बाद से पूरे परिवार की परेशानियां और ज्यादा बढ़ गई। अस्पताल और कानूनी उलझनों में उलझने के बाद परिवार इतना भयभीत है कि दो दिन पहले दुष्कर्म पीड़ित की बड़ी बहन को अस्पताल से डिस्चार्ज मिलने के बाद भी वे गांव नहीं जा रहे हैं।
दर्द की कहानी... दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग की मौसी की जुबानी
बहन के शांत होने के बाद उसकी दो बेटियों को मैंने बड़ा किया। प्रिया (परिवर्तित नाम) की बड़ी बहन का विवाह कर दिया है। प्रिया उज्जैन स्थित पोस्ट मैट्रिक छात्रावास में 9वीं कक्षा में पढ़ती थी लेकिन पिछले साल छात्रावास में सांप के काटने से दो बच्चे की मौत होने के बाद प्रिया की तबीयत खराब हो गई थी। इस घटना के डर से मैं उसे घर ले आई थी। हमारा पूरा परिवार मजदूरी करता हैं। प्रिया की तबीयत ठीक होने के बाद वह खेत में मजदूरी के लिए चली गई थी। इसी दौरान पता नहीं कब धर्मेंद्र आंजना ने बेटी से दुष्कर्म कर दिया। जबकि धर्मेंद्र की खुद की बेटी प्रिया की उम्र की हैं। जनवरी में प्रिया को पेट में तेज दर्द हुआ तो भैरवगढ़ स्थित एक डॉक्टर से जांच कराई। उन्होंने बताया कि प्रिया गर्भ से हैं सोनोग्राफी कराओ। प्राइवेट पैथालॉजी पर सोनोग्राफी कराई। डॉक्टर से गर्भपात के लिए कहा तो उन्होंने मना कर दिया। इसके बाद घर में चुपचाप बैठ गए थे। शाम को अचानक डाॅयल-100 आई और पूछताछ की। पुलिस को सच्चाई बताई तो उन्होंने थाने जाने की सलाह दी। वे स्वयं बैठाकर थाने ले गए। भैरवगढ़ थाने के पुलिसकर्मी धर्मेंद्र के दोस्त है, वे उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं करते। इसलिए सीधे अजाक थाने पहुंचे। 29 जनवरी को अजाक थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी लेकिन धर्मेंद्र की गिरफ्तारी नहीं की। वह रोजाना घर के सामने से गाली-गलोज करते हुए निकलता। दो माह बाद 22 मार्च को कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी शिकायत की तो धर्मेंद्र ने उसके भाई और भतीजों के साथ मिलकर पूरे परिवार से मारपीट की। बड़ी बेटी का बायां पैर तोड़ दिया। उसे लेकर माधवनगर अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिसकर्मियों ने बताया उसकी जमानत होने वाली है यदि आप नहीं चाहते तो आपत्ति लेना चाहिए। हम कैसे आपत्ति ले, वो बाहर निकलकर पूरे परिवार को जान से खत्म कर देगा। अब भी उसके परिवार के अन्य सदस्य गांव में मौजूद है जो अब भी मार सकते हैं।
स्टे की आड़ में नहीं किया गिरफ्तार
दुष्कर्म के आरोपी धर्मेंद्र को पता चला बालिका ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। धर्मेंद्र हाईकोर्ट में मामले की जांच के बाद गिरफ्तारी के लिए पहुंचा। हाईकोर्ट से उसे 15 दिन का स्टे भी मिल गया। 15 दिन के आदेश की आड़ में पुलिस ने 2 महीने तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की। इन दो महीनों तक पीड़ित परिवार ने रोज धर्मेंद्र की गालियां और धमकी सहन की। 23 मार्च को फिर विवाद हुआ, जिसमें धर्मेंद्र सहित उसके बड़े भाई जगदीश और दो अन्य ने पूरे परिवार से मारपीट की और पीड़ित की बड़ी बहन का एक पैर तोड़ दिया।
जाति प्रमाण पत्र नहीं, इसलिए अब तक नहीं मिला मुआवजा
सीधी बात : धर्मराज सूर्यवंशी, डीएसपी, अजाक एवं जांच अधिकारी
मुझे नहीं पता, मेरे पास 15 दिन पहले ही फाइल आई
जनवरी में दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज हुई, गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई थी?
हाईकोर्ट से आदेश हुआ था कि 15 दिन जांच के बाद कार्रवाई करें।
आदेश जनवरी में हुआ था, दाे माह तक गिरफ्तारी क्यों नहीं की?
मुझे नहीं पता, 15 दिन पहले मेरे पास फाइल आई तो मैंने गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस की लापरवाही से आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ और फिर पीड़ित परिवार से मारपीट की, इसके बाद आरोपी गिरफ्तार हुआ, ऐसा क्यों?
आरोपी फरार था, इसी दौरान उसने वारदात को अंजाम दिया, कार्रवाई कर रहे हैं।