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शहर में सूदखोरी का रैकेट, जरुरतमंदों को 20 फीसदी ब्याज काटकर रुपए

3 वर्ष पहले
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माधवनगर थाने में सूदखोरों की शिकायत के लिए अलग से काउंटर है।

एक सच्ची कहानी... सूदखोरों के चंगुल में फंसता चला गया परिवार

अंकपात मार्ग के 35 साल के लक्ष्मण मीणा विवाहित है। प्राइवेट नौकरी कर वे 7 हजार रुपए प्रतिमाह कमाते हैं। 17 दिसंबर 2016 को प|ी की अचानक तबीयत खराब होने पर 5 हजार रुपए 10 प्रतिशत की दर पर सूदखोर से लिए। अगले माह उन्हें वेतन के रूप में 7 हजार रुपए मिले। इसमें से 500 रुपए सूदखोर को ब्याज दे दिया। 6 हजार 500 रुपए बचे। घर का राशन, गैस सिलेंडर आदि खर्च में उसका पूरा वेतन दो-तीन दिन में खत्म हो गया। नौकरी से घर नहीं चलेगा यह सोचकर खुद के कारोबार के लिए स्वरोजगार योजना के अंतर्गत ऋण के लिए केनरा बैंक में आवेदन किया। ऑनलाइन आवेदन, सीए द्वारा कोटेशन बनवाने में उसे 1 हजार 500 रुपए का खर्च हो गए। लक्ष्मण ने फिर से 2 हजार रुपए सूदखोर से उधार लिए। आवेदन फॉर्म रोजगार कार्यालय में जमा किया। 15 दिन में यह आवेदन बैंक पहुंचा। मैनेजर ने खुद के बैंक में खाता खुलवाने और उसमें तीन-चार महीने तक लेन-देन का रिकार्ड चेक करने के बाद ऋण स्वीकृत करने की बात की। महीना पूरा हो गया। लक्ष्मण को इस बार 7 हजार रुपए का 700 रुपए ब्याज देना पड़ा। बैंक में खाता खुलवाने के लिए सूदखोर से 3 हजार रुपए लिए। अब 10 हजार रुपए कर्ज हो गया। प्रतिमाह 1 हजार रुपए ब्याज देना पड़ता। चार माह बाद बैंक को अपना व्यापार दिखाने के लिए 20 हजार रुपए फिर से सूदखोर से पैसा लिया। मार्च 2017 में लक्ष्मण पर कुल 31 हजार रुपए का कर्ज था। इसके लिए वह प्रतिमाह 3100 रुपए ब्याज सूदखोरों को दे देता। इस कर्ज को उतारने के लिए उसने और ज्यादा कर्ज ले लिया। इसी बीच घर-परिवार के खर्च बढ़ गए और 17 अप्रैल की स्थिति में लक्ष्मण 1.5 लाख रुपए के कर्ज तले दबा हैं। सूदखोरों के डर से उसने शहर छोड़ दिया। बैंक ने स्वरोजगार योजना के अंतर्गत उसका लोन स्वीकृत नहीं किया।

शहर में 131 लाइसेंसी साहूकार

नगर निगम साहूकारी का लाइसेंस तो देता है लेकिन उसका उपयोग कौन, कैसे कर रहा है इससे उसे कोई सरोकार नहीं हाेता। पिछले साल 131 लोगों ने साहूकारी के लाइसेंस बनवाए। इस साल 19 आवेदन आए हैं। राजस्व विभाग अन्यकर के प्रभारी सहायक आयुक्त के अनुसार निगम संबंधित से शपथ पत्र लेता है कि उसका कोई अपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इसके बाद ही उसे लाइसेंस जारी करता है। इसकी अवधि एक साल की होती है। इसके बाद नवीनीकरण करना होता है।

शिकायत मिलते ही कार्रवाई के निर्देश दिए हैं

सभी थानों में शिकायत काउंटर बनाए हैं। शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सचिन अतुलकर, एसपी

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