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430 तापमान, फील्ड वर्क व रोजा... रोजेदार बोले- यही तो इबादत की ताकत

3 वर्ष पहले
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यह इबादत का ही असर है कि 43.5 डिग्री की इस गर्मी में मुस्लिम समाजजन 15 घंटे बगैर कुछ खाए-पीए रोजे रखते हुए दिनभर अपने सभी नियमित कामकाज कर रहे हैं। बल्कि कई मुस्लिम भाइयों का तो यह तक कहना है कि वह रमजान में दोगुना क्षमता से काम कर रहे हैं। खास बात यह है कि 43 डिग्री से अधिक तापमान की जिस गर्मी में सामान्य इंसान को हर आधे घंटे में प्यास लगती है, उसी तापमान में मुस्लिम समाजजन बिना कुछ खाए-पीए सामान्य लोगों की तरह काम करते नजर आते हैं। इसे वह रमजान में इबादत का असर मानते हैं।

तीन दिन पहले ही दोपहर में लंच नहीं किया तो आने लगे थे चक्कर

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाली अकादमी के मैनेजिंग डायरेक्टर नईम खान बताते हैं वे रमजान से तीन दिन पहले दोपहर 3 बजे तक लंच नहीं कर पाए थे। घर के लिए निकले तो चक्कर आने लगे आैर लगा जैसे ब्लड प्रेशर कम हो रहा है। खान के अनुसार यह रमजान में इबादत का ही असर है रोजे में पता ही नहीं चला कि कुछ खाया नहीं है। रोजे में खाना-पीना नहीं होता इसलिए दोपहर को भी घर नहीं जाते।

अब तो ऐसा महसूस होता है जैसे मेरी कार्यक्षमता दोगुना हो गई

आर्किटेक्ट सरफराज कुरैशी प्रत्येक रमजान में रोजे रखते हैं। सरफराज का कहना है फील्ड वर्क होने से दिनभर घूमना भी होता है। शरीर में कुछ बदलाव आता है तो पहले दिन थोड़ा-सा कष्ट होता है लेकिन इसके बाद नियमित रोजे रखते हुए खान-पान की याद तक नहीं आती। भोजन करने पर शरीर में आलस्य की वृद्धि होती है। रोजे में दिनभर खाना-पीना नहीं होने से मुझे तो ऐसा महसूस होता है कि मेरी कार्यक्षमता दोगुना हो गई है।

फील्ड में रहना पड़ता है लेकिन काम पर असर नहीं होता

उज्जैन के ही शादाब अहमद सिद्दीकी वर्तमान में सीहोर में जिला आबकारी अधिकारी हैं। शादाब का कहना है कि जब से होश संभाला है, तब से ही रोजे रखते आ रहे हैं। ऑफिसर होने के कारण रमजान के दौरान भी दिनभर फील्ड में रहना पड़ता है। यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि अल्लाह हमें अतिरिक्त शक्ति देता है। इसलिए कई घंटे बगैर कुछ खाए-पीए रहने के बावजूद भूख-प्यास का ध्यान नहीं रहता। कार्यक्षमता पर भी कोई असर नहीं होता।

सोमवार को ऐसा रहा दिनभर में तापमान

320

सुबह 8 बजे

इसी जद्दोजहद को जिहाद कहते हैं

शहरकाजी खलीकुर्रेहमान कहते हैं पवित्र रमजान ही परीक्षा की असली घड़ी होती है, जिसमें बगैर कुछ खाए-पीए ऊपर वाले की इबादत होती है। इसी जद्दोजहद को ही असली जिहाद कहते हैं।

400

350

सुबह 10 बजे

सुबह 12 बजे

41.50

43.5

सर्वाधिक तापमान

दोपहर 2 बजे

390

शाम 4 बजे

शाम 6 बजे

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