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37 लाख रुपए खर्च कर बनाए दो स्मार्ट टॉयलेट, पानी का कनेक्शन ही नहीं किया

3 वर्ष पहले
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शहर को स्मार्ट बनाने के नाम पर निगम ने पहला काम जो किया है वह है स्मार्ट टॉयलेट। 37 लाख रुपए में बनाए इन टॉयलेट का उपयोग लोग नहीं कर पा रहे हैं। इसकी दो वजह हैं। पहली इनमें पानी का बंदोबस्त नहीं है। दूसरी इनमें नियमित सफाई नहीं हो रही है।

मॉडल बनाने का दावा किया था, तीन महीने से पानी नहीं

शहर को साफ रखने के क्रम में टावर चौक पर 20 लाख रुपए में बायो टॉयलेट इसी साल फरवरी में बनाया गया था। यह शहर का पहला बायो टाॅयलेट था। प्रयोग के तौर पर बनाए इस टॉयलेट के लिए सीवर लाइन की भी जरूरत नहीं है।

निजी बैंक के सहयोग से तैयार किया शौचालय

सुनहरी घाट पर भी स्मार्ट टॉयलेट की सुविधा मिल सकेगी। शनिवार को महापौर मीना जोनवाल ने इसकी शुरुआत की। इसे 17 लाख में निजी बैंक के सहयोग से बनवाया है। इसमें रैंप, ब्लाॅक्स के काम निगम ने करवाए हैं।

इसलिए मान रहे स्मार्ट

इसका उपयोग नि:शुल्क किया जा सकेगा। ये टॉयलेट ऐसे क्षेत्रों में स्थापित किए जा सकते हैं, जहां पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं है। इसमें जैव-एंजाइम आधारित उपचार प्रणाली के साथ एक सैप्टिक टैंक होता है। यह प्रणाली हानिकारक बैक्टीरिया के लिए कचरे का समाधान करती है।

टावर पर बनाया स्मार्ट टॉयलेट। जिसमें पानी की टंकी तो रखी लेकिन कनेक्शन नहीं किया।

सुनहरी घाट पर बनाया स्मार्ट टॉयलेट। इसे ऐसी जगह बनाया है जहां बारिश में नदी का पानी बढ़ा तो टाॅयलेट में कीचड़ हो जाएगा।

टॉयलेट बनाए हैं तो पानी की व्यवस्था भी करेंगे

स्मार्ट टाॅयलेट के कंसेप्ट के तहत इन्हें बनाया है। इनमें टंकियां रखवाई हैं। कनेक्शन भी जल्द ही कर दिया जाएगा। वैसे भी ये कम पानी में उपयोग किए जा सकते हैं। मीना जोनवाल, महापौर

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