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मालवा प्रांत प्रमुख बोले- शादी हो या चुनाव कुछ रिश्तेदार तो रुठते ही हैं, मनाना पड़ता है

3 वर्ष पहले
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शादी हो या चुनाव, कुछ रिश्तेदार तो रुठते ही हैं, वे राेज रुठें तो कौन मनाएगा पर शादी के लिए उन्हें मनाना पड़ता है, यही चुनाव के पहले हो रहा है। सामाजिक समरसता मालवा प्रांत प्रमुख प्रमोद झा ने सरकार से रुठने वाले भाजपाइयों को इस लहजे में नसीहत दी। उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ 1925 से सामाजिक समरसता पर चल रहा है। उस समय न तो चुनाव थे, न ही किसी राज्य में भाजपा सरकार। इसलिए यह कहना गलत है कि विधानसभा और अगले साल होने वालेे लोकसभा चुनाव के कारण सामाजिक समरसता पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। वे शनिवार रात शिप्रा तट पर सामाजिक सदभाव समिति की अगुवाई में आयोजित सामाजिक सदभाव सम्मेलन में मुख्य वक्ता थे। सम्मेलन के आखिर में उन्होंने समरसता भोज में भी भागीदारी की।

शनिवार को 85 समाज के लोगों ने पहली बार एक साथ शिप्रा आरती की। महिलाओं ने तट पर रंगोली बनाई। संतों ने मंच से आशीर्वाद दिया। संविधान निर्माता डॉॅ. भीमराव आंबेडकर की 127वीं जयंती पर सामजिक सदभाव समिति ने अनूठा आयोजन किया। संयोजक कुलदीप जोशी, जसविंदरसिंह ठकराल थे। शुरुआत महाराष्ट्र समाज की चित्रा पंडित और समूह के भजनों से हुई। इसके पहले शिप्रा आरती हुई। संतों के साथ सामाजिक समरसता के प्रांत प्रमुख प्रमोद झा मंचासीन थे। रामानुजकोट के पीठाधीश्वर स्वामी रंगनाथाचार्यजी महाराज ने कहा- परमात्मा सबका एक ही है। अनेकता में एकता यही हमारी संस्कृति है। समरसता वाले कार्यक्रम भी उसी का एक भाग है। झा ने कहा- समाज का संरक्षण, संवर्धन करने वालेे जितने भी संत है, उन सभी का स्मरण करने का आज अवसर है। भारतीय संस्कृति का कोई भी ऐसा दिन नहीं है जब कोई महान व्यक्तित्व पैदा न हुआ हो। आज 14 अप्रैल को हमने उस परंपरा को धन्यवाद देने का अवसर खड़ा किया है। उन्होंने अप्रैल में जन्म लिए महापुरुषों के बारे में बताया। आखिर में सभी ने 2100 दीपकों से शिप्रा आरती की। बंगाली समाज की महिलाओं ने मंच से शंखनाद किया। संघ ने पहली बार टावर चौक स्थित आंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया। विभाग प्रमुख विनय दीक्षित, सुरेश गिरी व संघ के अन्य पदाधिकारी साथ थे। इस दौरान स्वामी रंगनाथाचार्यजी महाराज पीठाधीश्वर रामानुजकोट, महंत पर्वतदास साहेब गादीपति श्रीसदगुरु कबीर मुक्तिधाम, योगीपीर रामनाथजी महाराजा गादीपति महंत भर्तृहरि गुफा, महंत दिग्विजयदासजी महाराज, निर्वाणी अखाड़ा, महंत बालकृष्णजी महाराज दिगंबर अखाड़ा, शीतलामाता गोशाला, महामंडलेश्वर ज्ञानदासजी महाराज श्री दादू आश्रम भैरवगढ़, चरणजीतसिंह गिल, ग्रंथी, गुरुद्वारा, दाशमेश दरबार, नानाखेड़ा मौजूद थे।

एससीएसटी एक्ट पर पुनर्विचार याचिका सही

झा ने कहा जाति के अाधार पर किसी भी भेदभाव अथवा अत्याचार का संघ सदा से विरोध करता है। इस प्रकार के अत्याचारों को रोकने के लिए बनाए कानूनों का कठोरता से परिपालन होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से असहमति प्रकट करते हुए केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका को उचित मानते हैं। झा का कहना है यह मैं नहीं, संघ के कार्यकारी सचिव गोपाल आर्य के पत्र में लिखा था, जो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय वाले दिन लिखा था।

रामघाट पर शिप्रा की आरती में शामिल साधु-संत, समाजजन व संघ के पदाधिकारी।

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