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नकद धन के लिए किसान बेच रहे उपज

3 वर्ष पहले
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उज्जैन | तीन दिन के लिए मंडी बंद है और गांव-गांव में शादी का दौर चल रहा है। किसानों को नकद धन की जरूरत ने ही मंडी बंद में भी खेरची व्यापार बढ़ा दिया है। किसानों ने चना, गेहूं, सोयाबीन बेचा। खरीदार व्यापारी तो रिस्क लेकर ही नकद में कृषि उपज खरीद रहे हैं। तीन दिन बाद भाव घटे तो अधिक नुकसान मिलेगा। आदर्श पट्‌टी में शनिवार को खाने का गेहूं 1950 रुपए तक खूब बिका। खेरची व्यापार वाले इस साल माल भर कर ग्राहकों का इंतजार ही कर रहे हैं।

कृषि उपज परिवहन के लिए नहीं मिल रहे ट्रक: कृषि उपज का व्यापार ग्राहकी अभाव के दिन काट रहा है। अगर आॅर्डर मिले भी तो ट्रक नहीं मिल रहे हैं। शादी का दौर चलने से ट्रकों की कमी आ गई। इसके अलावा सरकारी समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी के परिवहन में ट्रक लग गए हैं। आलू-प्याज पर भाड़ा अधिक मिलता है, जबकि अनाज व्यापार में गाड़ी लगे और साउथ भेजें तो 5-7 दिन टूट जाते हैं। लोकल में 3-4 हजार रुपए रोज का भाड़ा मिल जाता है। दूसरी ओर अखातीज के विवाह होने से भी गाड़ियों की कमी महसूस की जा रही है। मौसम खराब होने से व्यापारी को तय सौदे के मुताबिक गाड़ी लोड करना होती है, लेकिन भाड़ा बढ़ाकर दो फिर भी ट्रक नहीं मिल रहे हैं।

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