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बुध-कृतिका योग में आज से शुरू होगा अधिकमास

3 वर्ष पहले
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बुधवार से अधिक मास शुरू हो जाएगा। ज्योतिषविदों के अनुसार अधिकमास बुधवार से शुरू होगा और बुधवार (13 जून) को ही समाप्त होगा। बुध-कृतिका योग में शुरू हो रहे अधिकमास में सप्त सागर, नव नारायण और चौरासी महादेव यात्रा, पूजन का विशेष फल मिलेगा। अधिकमास की शुरुआत में विशेष संयोग बन रहे हैं। पं. अमर डिब्बेवाला के अनुसार ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, बुधवार, कृतिका नक्षत्र, गंड योग व बव करण के साथ उच्च राशि के चंद्रमा में अधिकमास की शुरुआत हो रही है। बुधवार और कृतिका नक्षत्र इसे और खास बना रहे हैं। माह में विशेष व्रत-त्योहारों का भी संयोग रहेगा। स्कंद पुराण के अनुसार अधिकमास का उज्जैन में खास महत्व भी है। यहां सप्त सागर, नव नारायण और चौरासी महादेव विराजमान हैं। इनकी यात्रा, पूजन आदि का विशेष पुण्य मिलेगा। सप्त सागर की यात्रा व पूजन से सात गुना, नव नारायण की यात्रा व पूजन से नौ गुना तथा चौरासी महादेव की यात्रा व पूजन से चौरासी गुना पुण्य मिलने का शास्त्रों में उल्लेख है। अधिकमास में ऐसे संयोग बहुत कम बनते हैं।

सप्त सागर के नाम और वहां दान की जाने वाली सामग्री

रूद्र सागर-
चांदी का बैल, अन्न, नमक, पुरुष वस्त्र

पुष्कर सागर- पीला कपड़ा, चने की दाल, पीला फूल, सोना, हल्दी खड़ी, पुखराज

क्षीरसागर- खीर या दूध से भरा चांदी का पात्र, शकर, चावल, साबूदाना

गोवर्धन सागर- लाल कपड़ा, गेहूं, गुड़, कासे का पात्र, माखन, मिश्री

र|ाकर सागर- साड़ी, ब्लाउज, चूड़ी़, बिछिया, पंचर|, श्रीफल, पुरुष वस्त्र

विष्णु सागर- आचमनी पञ्च पात्र, भगवान की मूर्ति, गरुड़जी, गोमुखी माला, आसन और पुराण

पुरषोत्तम सागर- कासे की थाली, 2 या चलनी, 33 मालपुए, स्वर्ण, गुप्त दान, लाल कपड़ा, कच्चा सूत

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