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रास्तों पर अतिक्रमण कार्रवाई क्यों नहीं?

3 वर्ष पहले
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फ्रीगंज में हर जगह 80 फीट की दूरी पर 10 फीट चौड़ी गली छोड़ी थी ताकि आम लोगों का आवागमन हो सके। जरूरत पड़ने पर यहां फायर फायटर भी आ सके। इन घरों से निकले कचरे को उठाया जा सके लेकिन नगर निगम के अफसरों की लापरवाही और मिलीभगत के चलते इन गलियों पर खास लोगों का कब्जा हो गया। कहीं किचन बना दिया तो कहीं शौचालय। कुछ जगह लोहे की जालियां लगाकर कब्जा कर लिया। इतना ही नहीं पक्के निर्माण भी हो गए हैं। निगम अफसर या तो मौका मुआयना करने की बात कर रहे हैं या शिकायत मिलने की।

शहर के सबसे पॉश इलाके फ्रीगंज की एक भी गली अतिक्रमण से मुक्त नहीं है। रहवासियों का कहना है कि निगम की टीम टावर चौक, पुरानी सब्जी मंडी, शहीद पार्क से अस्थायी अतिक्रमण तो हटाती है लेकिन स्थायी अतिक्रमण को नजरअंदाज कर देते हैं। निगम अफसरों और रसूखदारों की मिलीभगत से फ्रीगंज अब अतिक्रमणगंज बनने की ओर है।

ग्वालियर स्टेट ने बनाया था ले-आउट, हम सहेज भी नहीं सके

1936 में ग्वालियर स्टेट ने फ्रीगंज का ले-आउट बनाया था। जिसमें तय था कि मकानों के बीच 10 फीट की गलियां छोड़ी जाएंगी। जिसका उपयोग दोनों मकान मालिक कर सकेंगे लेेकिन यह निगम के स्वामित्व में ही रहेगी। निगम के अफसर ले-आउट बरकरार भी नहीं रख पाए।

अतिक्रमण से यह नुकसान

लोगों का आवागमन बाधित हो रहा है, उन्हें घुमकर जाना पड़ रहा है।

आग लगने पर फायर फायटर के आने की जगह नहीं है।

अतिक्रमण होने से यहां ठीक से सफाई भी नहीं होती।

सार्वजनिक रास्ते आम लोगों के आने-जाने के लिए ही हैं। आपके आसपास भी किसी रास्ते पर अतिक्रमण है और इससे आवागमन प्रभावित हो रहा है तो हमें वाट्स एप नंबर 9977548851 पर बताएं।

पक्के अतिक्रमण के लिए ये हैं

जिम्मेदार, अब दे रहे सफाई

मुझे जानकारी हैं, अफसर करें कार्रवाई

फ्रीगंज की गलियों में सीढ़ियां बनाई जा सकती हैं लेकिन पक्के निर्माण कर उसे बंद नहीं किया जा सकता। इस संबंध में जानकारी मिली है लेकिन कार्रवाई निगम अफसर करेंगे। बुद्धिप्रकाश सोनी, अध्यक्ष, झोन क्र. 4

सर्वे करेंगे, अतिक्रमण मिला तो कार्रवाई होगी

फ्रीगंज में मकानों के बीच छोड़ी गई 10 फीट की गलियों में अतिक्रमण के संबंध में सर्वे के बाद ही बताया जा सकेगा। जहां भी अतिक्रमण हैं, वहां से गैंग भेजकर कार्रवाई करेंगे। अरुण जैन, प्रभारी ईई

फ्रीगंज में 39 गलियारे, सब पर कब्जे कहीं किचन बना लिया तो कहीं दुकान

कमला नेहरू मार्ग की गली में निजी शौचालय ही बना लिया है। मकान मालिका का कहना है शौचालय बनाया है लेकिन गलियारे के अंत में।

पूरा गलियारा ही कब्जे में

फ्रीगंज में एक मिठाई दुकान संचालक ने गली के एक सिरे पर कड़ाव रखकर उसे बंद ही कर दिया है।

व्यवसाय के लिए पक्का निर्माण

गली में पक्का निर्माण तो किया ही, साथ में दुकानें निकाल कर उसका व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है।

...और इधर, प्रभारी मंत्री के दौरे का बहाना, ऋषिनगर में कोई टीम सर्वे के लिए नहीं पहुंची

ऋषिनगर की 23 गलियों, जिनसे पहले लोगों का आवागमन होता था। अतिक्रमण के कारण बंद हो गई हैं। बुधवार को जिले के प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह शहर में थे। इसका बहाना बनाकर नगर निगम ने ऋषिनगर में कोई टीम सर्वे के लिए भी नहीं भेजी। आयुक्त ने कहा- जिन लोगों ने रास्ते बंद कर दिए हैं। उन्हें नोटिस जारी करेंगे। गलियों को फिर से खोला जाएगा।

गली में होटल का कब्जा

कमला नेहरू मार्ग की गली में होटल संचालक ने किचन ही बना लिया। मकान मालिक सेवानिवृत्त कर्मचारी सुरेंद्र भटनागर हैं।

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