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सांसद की आपत्ति- पूर्व विधायक मालवीय के नाम पर तीन कामों का नामकरण क्यों?

3 वर्ष पहले
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बुधवार को प्रदेश के गृह मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह की अध्यक्षता में जिला योजना समिति की बैठक हुई। बैठक में घटिट्या के विधायक सतीश मालवीय के पिता एवं पूर्व विधायक नागूलाल मालवीय के नाम से घटिट्या के नवनिर्मित बस स्टैंड, कॉलेज और स्टेडियम के नामकरण के मुद्दे पर सांसद प्रो.चितामणि मालवीय ने आपत्ति ली। उन्होंने निर्माण एजेंसी के अफसरों से पूछा नामकरण के लिए प्रस्ताव किसने दिए? अफसरों ने जवाब दिया- हमने कोई प्रस्ताव नहीं दिए। उन्होंने पूछा कि क्या तीनों निर्माण पूरे हो गए हैं? जवाब आया- कॉलेज और स्टेडियम का काम पूरा हो चुका है। बस स्टैंड का फ्लोरिंग का काम चल रहा है। यह सुन सांसद ने सवाल खड़े किए कि जब काम ही चल रहा है तो नामकरण अभी से क्यों? वे यह भी बोले कि तीन-तीन कामों के नामकरण एक ही व्यक्ति के नाम से क्यों? बाद में कहा कि नामकरण करना ही है तो कुशाभाऊ ठाकरे, दीनदयाल उपाध्याय, राजाभाऊ व राणा प्रताप सिंह के नाम से क्यों ना करें। प्रभारी मंत्री ने इन्हें पेंडिंग रख दिया।

आमने-सामने... दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े

ग्राम व जनपद पंचायत से सहमति

नामकरण की प्रक्रिया तो पूरी हो चुकी हैं। ग्राम और जनपद पंचायत के बाद शासन से भी नामकरण के लिए अनुमोदन हो चुका हैं। तात्कालीन कलेक्टर भोंडवे जानते हैं, जो आपत्ति ले रहे हैं शायद उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं होगी। सतीश मालवीय, विधायक घटिट्या

वे कांग्रेसी भी थे, इसलिए आपत्ति

यदि शासन से नामकरण का अनुमोदन हुआ है तो वे दस्तावेज कहा हैं। बैठक में प्रभारी मंत्री ने प्रस्ताव ही खारिज कर दिया। पालन प्रतिवेदन भोपाल जाएगा तो मामला स्वत: ही खत्म हो जाएगा। आपत्ति इसलिए भी कि वे कांग्रेसी भी थे। प्रो.चिंतामणि मालवीय, सांसद

एजेंडे में शामिल था विधायक का अनुशंसा पत्र

बैठक के एजेंडे में विधायक मालवीय का पत्र संलग्न था। कलेक्टर के नाम जारी इस पत्र में नामकरण के संबंध में ग्राम पंचायत व जनपद पंचायत घटिट्या द्वारा पारित प्रस्ताव के अनुसार कार्यवाही करने की अनुशंसा की थी। साथ में ग्राम व जनपद पंचायत द्वारा पारित प्रस्ताव की प्रतिलिपियां भी लगाई थी।

टिकट नहीं मिलने पर भाजपा छोड़ कांग्रेस में गए थे पूर्व विधायक

नागूलाल मालवीय 1977 से 1980 तक जनता दल से तराना के विधायक रहे। 1980 से 85 तक भाजपा से घटिट्या के विधायक रहे। इसके बाद टिकट नहीं मिलने पर भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए थे। वर्ष 1991 में पंचायत के चुनाव में वे जिला पंचायत अध्यक्ष पद के उम्मीद्वार थे। इनके सामने भाजपा समर्थित उम्मीद्वार दयाराम पंवार खड़े थे। हालांकि किन्हीं कारणों से ये चुनाव नहीं हो पाए थे। वर्ष 1993 में मालवीय का निधन हुआ।

कान्ह के गंदे पानी के लिए उज्जैन में ट्रीटमेंट प्लांट, प्रभारी मंत्री बोले- शिप्रा साफ हो और फिल्टर वाटर महिदपुर सहित सभी जगह पहुंचे

कान्ह का गंदा पानी ट्रीट करने के लिए सांवेर या उज्जैन में ट्रीटमेंट प्लांट बन सकता है। इसके संकेत बुधवार को जियोस की बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह ने दिए। दरअसल बैठक में सांसद व विधायकों ने शिकायत की कि इस प्रोजेक्ट पर 100 करोड़ों खर्च करने के बावजूद शिप्रा में गंदे पानी की समस्या बनी हुई हैं। त्रिवेणी के समीप और कालियादेह महल पर भी नदी में भी गंदा पानी मिल रहा है। विधायक बहादुर सिंह चौहान ने कहा कि उज्जैन से छोड़े जा रहे कान्ह के गंदे पानी से महिदपुर में समस्या खड़ी हो गई हैं। ऐसे में सभी जनप्रतिनिधियों ने ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने की मांग बैठक में रखी। इस पर प्रभारी मंत्री ने कहा कि शिप्रा साफ हो और फिल्टर पानी ही महिदपुर सहित सभी जगह पहुंचाया जाए। लिहाजा अब इस विषय को कलेक्टर मनीष सिंह देखेंगे।

प्रभारी मंत्री जी रंगा-बिल्ला पर आप भी हंटर चलाओ

बैठक में महिदपुर विधायक ने सरकारी खरीदी के अनाज का परिवहन करने वाले रंगा-बिल्ला को लेकर कलेक्टर मनीष सिंह द्वारा की गई कार्रवाई की प्रशंसा की। प्रभारी मंत्री से यह भी कहा कि अब अाप भी इन पर हंटर चलाओ। यह सुन सभी हंस पडे।

घटि्टया विधायक का जवाब- इन्हें मालूम नहीं नामकरण के लिए शासन पहले ही अनुमोदन कर चुका है

जिपं अध्यक्ष व विधायक हुए आमने-सामने

बैठक में पीएचई के अधिकारी नल जल योजना का जिक्र करते हुए अंचलों की पेजयल व्यवस्था बेहतर होने के दावे कर रहे थे। इसी बीच जिला पंचायत के अध्यक्ष महेश परमार ने कहा ये गलत जानकारी दे रहे हैं। हमारा गांवों में जाना दूभर हो गया है क्योंकि अधिकतर जगह योजना बंद हैं। लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है। यह सुन विधायक चौहान ने कहा कि जब 253 योजनाएं पंचायतों को हैंडओवर हो चुकी है तो आप अध्यक्ष होने के नाते उन्हें संधारित करो। परमार ने कहा कि पंचायत को रुपए खर्च करने के अधिकारी नहीं है। इस पर प्रभारी मंत्री ने प्रभारी सीईओ बीके मंडलोई से वस्तुस्थिति स्पष्ट करने को कहा। वे बोले कि कही कोई पाबंदी नहीं है लेकिन खर्च का निर्धारण भोपाल से हो रहा है। यह सुनकर विधायकों व परमार में बहसबाजी शुरू हो गई। तब प्रभारी मंत्री ने इन्हें शांत करवाया और जरूरत अनुसार पंच परमेश्वर की राशि से नलकूप खनन व पंप खरीदी आदि पेयजल संबंधित कार्य करवाने के निर्देश दिए।

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