शहर में पहली बार दो जैन मंदिरों के बीच भगवान की दो प्रतिमाओं का आदान-प्रदान हुआ और दोनों मंदिरों में प्रतिष्ठा समारोह किया गया। क्षीरसागर स्थित सीमंधर जैन मंदिर से भगवान चंदप्रभु की प्रतिमा रविवार को अहिंसा रैली के साथ मंडी स्थित महावीर मंदिर ले जाई गई, जहां प्रतिष्ठा समारोह हुआ। मंडी स्थित महावीर मंदिर से भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा क्षीरसागर मंदिर में प्रतिष्ठित की गई। क्षीरसागर मंदिर में चंद्रप्रभु की दो प्रतिमाएं प्रतिष्ठित थी तथा मंडी स्थित मंदिर में भगवान शांतिनाथ की दो प्रतिमाएं थीं। दोनों मंदिर में दो-दो प्रतिमाएं होने से ट्रस्टियों ने तय किया कि एक-एक प्रतिमा दोनों मंदिरों के बीच आदान-प्रदान करने से दोनों मंदिरों में एक-एक प्रतिमा दोनों भगवानों की प्रतिष्ठित हो जाएगी। इसके लिए 14 मई से समारोह का आयोजन किया गया। शनिवार को क्षीरसागर स्थित मंदिर में भगवान शांतिनाथ की प्रतिष्ठा मंडल विधान के साथ कराई। रविवार को भगवान चंद्रप्रभु की प्रतिष्ठा मंडी स्थित मंदिर में कराई।
संस्कार शिविर के बच्चों ने की भागीदारी
क्षीरसागर मंदिर से रजत रथ पर भगवान चंद्रप्रभु स्वामी अहिंसा रैली में बच्चे भी ध्वज लहराते निकले। इसी के साथ संस्कार शिविर का समापन हुआ। फेडरेशन अध्यक्ष अरिहंत झांझरी व महामंत्री जंबू जैन धवल ने बताया शिविर में 272 बच्चों ने स्मार्ट पाठशाला में आधुनिक पद्धति से धर्म व नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ा। शिविर में बच्चों को किट वितरण चेतना पवन गोधा सनावद की ओर से किया गया। विमलचंद्र झांझरी, पं. प्रदीप झांझरी ने कक्षाएं लीं। क्षीरसागर से निकली रथयात्रा व अहिंसा रैली वीडी मार्केट, फाजलपुरा होते हुए मंडी पहुंची। रथयात्रा में महिलाएं मंगल कलश एवं अष्ट प्रतिहार्य मस्तक पर लेकर चल रही थीं। सौधर्म इंद्र अनिल ज्योति जैन बग्गी में जैन ग्रंथ समयसार लेकर सवार थे। भगवान विराजमान करने का सौभाग्य डॉ. भरत जैन, राजकुमार रावत को प्राप्त हुआ। विधान का उद्घाटन रमेशभाई शाह इंदौर ने किया। आयोजन विद्वान पं. संजय शास्त्री अलीगढ़ एवं अभय जैन खेरागढ़ वालों ने पूर्ण कराया।
चंद्रप्रभुजी
भगवान शांतिनाथजी
क्षीरसागर स्थित सीमंधर जैन मंदिर से निकली अहिंसा रैली में बड़ी संख्या में समाज की महिलाएं शामिल हुईं। रैली के आगे भगवान को रथ में विराजित कर निकाला।