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किसान मजदूर महासंघ की घोषणा-5 जून को धिक्कार, 6 को शहादत, 8 को सहयोग दिवस, दस को भारत बंद

3 वर्ष पहले
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किसानों की 25 मांगों को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने एक से 10 जून तक शांतिपूर्ण गांव बंद की घोषणा की है। रविवार को महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार कक्काजी ने मीडिया से चर्चा में कहा-ऐसा सरकार की गलत नीतियों के कारण करना पड़ रहा है। गांव बंद के तहत पांच जून को धिक्कार दिवस, छह जून को शहादत दिवस, आठ जून को सहयोग दिवस और दस जून को भारत बंद किया जाएगा। इस दौरान किसानों से आग्रह किया जाएगा कि वे गांवों से दूध, फल, सब्जियां शहर में न लाएं। न ही शहर से कोई सामान खरीदें।

महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा-गांव बंद के दौरान शहर से सटे गांवों में चौपाल लगाई जाएगी। जहां किसान वाजिब दाम पर दूध, फल, सब्जियां बेचेंगे। अस्पतालों और सरकारी वाहनों की दूध सप्लाय को नहीं रोका जाएगा।

इसलिए कर रहे गांव बंद

मंदसौर गोलीकांड के बाद दो किसानों की पुलिस ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। उन पुलिस वालों पर हत्या का केस दर्ज किया जाए।

मंदसौर गोलीकांड में जांच आयोग का गठन हुआ था, जिसे तीन माह में रिपोर्ट प्रस्तुत करना था, जो प्रस्तुत नहीं की गई।

कृषि उपजों का लागत आधार पर डेढ़ गुना मुनाफा जाेड़कर दाम दिया जाए।

किसानों और मजदूरों को सभी प्रकार के कर्ज से मुक्त किया जाए।

मंडियों में कोई भी उपज समर्थन मूल्य से नीचे न खरीदी जाए।

प्रधानमंत्री फसल बीमा को बंद कर किसान हितैषी फसल बीमा योजना लागू की जाए।

मंडियों में चुनाव 5 साल में कराए जाने की व्यवस्था करें।

मनरेगा योजना के तहत किए गए काम का भुगतान मजदूरों को तत्काल करें।

55 वर्ष से ज्यादा उम्र के किसानों और मजदूराें को पांच हजार रुपए प्रतिमाह पेंशन दें।

आंदोलन के पहले श्रेय लेने की होड़

गांव बंद आंदोलन के पहले श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई है। रविवार काे राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार कक्काजी ने गांव बंद को उनका आंदोलन बताया जबकि एक दिन पहले भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकेट ने कहा था-इसका किसान मजदूर महासंघ से कोई लेना-देना नहीं है।

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