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रेलवे ने निर्माण के आठ माह बाद ब्रिज की ऊंचाई 6.589 से बढ़ाकर 7 मीटर की, दो माह बाद भी ड्राइंग नहीं, काम रुका

3 वर्ष पहले
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सिंहस्थ क्षेत्र में बनाए जा रहे मोहनपुरा रेलवे ब्रिज की ऊंचाई रेलवे ने निर्माण शुरू होने के आठ माह बाद बढ़ा दी। अब रेलवे नई ड्राइंग डिजाइन भी नहीं भेज रहा है। ऐसे में दो माह से निर्माण रुका हुआ है। सेतु निगम को ब्रिज का निर्माण दिसंबर 2018 तक पूरा करके देना था लेकिन बीच में काम बंद होने से यह निर्माण वर्ष 2019 तक बन पाएगा।

बड़नगर रोड पर यू-शेप में उज्जैन से नागदा रेल सेक्शन में रेलवे समपार क्रमांक 23 पर मोहनपुरा रेलवे ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। सेतु निगम ने दिसंबर 2017 में इसका निर्माण शुरू किया था। 30 करोड़ की लागत से यह ब्रिज बनाया जाएगा। ब्रिज के 11 पिल्लर का निर्माण होने के बाद रेलवे ने अचानक ब्रिज की ऊंचाई बढ़ाते हुए 6.589 मीटर से 7 मीटर कर दी। रेलवे के इंजीनियर्स दो माह से नई ड्राइंग डिजाइन भी नहीं दे रहे हैं, ऐसे में काम बंद पड़ा है। सेतु निगम को दिसंबर 2018 तक ब्रिज का निर्माण पूरा करके देना था लेकिन दूसरी बार काम बंद होने से निर्माण समय पर पूरा नहीं हो पाएगा। सेतु निगम की ओर से लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं, संपर्क किया जा रहा है लेकिन ड्राइंग डिजाइन नहीं भेजी जा रही है। उन्हें कहा जा रहा है कि ड्राइंग फाइनल हो रही है। इसमें ही दो माह बीत गए। उसके बाद भी ड्राइंग नहीं आई है। इधर रेलवे के इंजीनियर्स का कहना है कि डबल डेकर को ध्यान में रखते हुए ब्रिज की ऊंचाई बढ़ाई है। इसकी ड्राइंग फाइनल हो रही है।

रेलवे ने खुद डिसाइड की थी ऊंचाई, उसके बाद भी बढ़ा दी

सेतु निगम व रेलवे के इंजीनियर्स ने संयुक्त रूप से लेवल डिसाइड किया था। जिसमें ओवर हेड वायर के लिए 6.589 ऊंचाई रखी गई। सब कुछ तय होने के बाद निर्माण शुरू किया गया। आठ माह तक निर्माण होने के बाद रेलवे ने अचानक ऊंचाई बढ़ा दी। स्पॉन यानी स्लैब को भी बार-बार बदल रहे हैं। सेतु निगम के अधिकारी भी इस निर्णय से आश्चर्यचकित रह गए, क्योंकि रेलवे के अधिकारियों ने ही ऊंचाई तय की थी, उनकी सहमति के बाद ही टेंडर लगाया गया था।

रेलवे क्रॉसिंग पर ब्रिज के पिलर का निर्माण शुरू होने के बाद काम रुक गया है।

ब्रिज की ऊंचाई बढ़ाने पर एप्रोच रोड 30 मीटर बढ़ेगी

रेलवे ब्रिज की ऊंचाई बढ़ाने का असर एप्रोच रोड पर भी पड़ेगा। ब्रिज निर्माण में 1:30 का अनुपात रहता है। ऊंचाई बढ़ने से लंबाई भी बढ़ेगी। ऐसे में एप्रोच रोड 30 मीटर तक बढ़ेगी। ब्रिज का बजट भी गड़बड़ाएगा। रिवाइज भी करना पड़ सकता है।

ऊंचाई रेलवे इंजीनियर्स के साथ मिलकर तय की थी

सेतु निगम एसडीओ बीडी शर्मा ने बताया ऊंचाई रेलवे के इंजीनियर्स के साथ तय की थी। उनकी सहमति से ही टेंडर लगाया था। आठ माह का निर्माण होने के बाद ब्रिज की ऊंचाई बढ़ा दी है। नई ड्राइंग नहीं मिलने से दो माह से काम रुका हुआ है।

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