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100 आराधक तीन दिन से निराहार, 6 घंटे में 1 लीटर गरम पानी ले रहे, आज पूरा होगा उपवास

3 वर्ष पहले
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नमकमंडी में चातुर्मास कर रहे गच्छाधिपति नित्य सेन सूरिश्वरजी महाराज के सानिध्य में 100 आराधकों ने तीन दिन की अट्‌ठम तप आराधना की। तीन दिन तक निराहार रहे। दोपहर 12 से शाम 6 बजे बीच केवल एक लीटर गरम पानी का आधार रखा। अब बुधवार को उनका यह कठिन उपवास पूरा होगा। इस मौके पर उनका सम्मान भी करेंगे।

आराधना के क्रम में इन अट्‌ठम तप आराधकों ने प्रतिदिन 125 मालाएं प्रभु पार्श्वनाथ की कर दिनभर आराधना की। इनके लिए गच्छाधिपति ने अभिमंत्रित उबला जल उपलब्ध कराया। इस जल के उपयोग से तप करने वाले आराधकों को सफलता में बाधा नहीं आती। गच्छाधिपति के सान्निध्य में बुधवार को उनके उपवास की पूर्णता होगी। सुबह 7.30 बजे इनका पारणा होगा। यानी उपवास पूर्ण कर आहार लेंगे। इसी तरह 20 आराधक एक महीने का ऐसा ही कठिन तप कर रहे हैं। वे निराहार रहकर केवल गरम पानी का उपयोग कर रहे हैं। अलग-अलग समय से उपवास शुरू करने वाले इन आराधकों के उपवास चातुर्मास के दौरान पूर्ण होंगे।

नमकमंडी में प्रवचन सुनने आई महिलाएं। इनमें अनेक आराधना करने वाली भी शामिल हैं।

निष्काम भाव से की गई

आराधना फलदायी

नित्य सेनजी महाराज ने प्रवचन में कहा आराधना से परमतत्व को प्राप्त कर सकते हैं। आराधना करना अर्थात पापों का नाश करना है। परमात्मा की प्रार्थना हम सिर्फ कामना के लिए करते हैं लेकिन निष्काम भाव से की गई आराधना फलदायी होती है। मुनि र| विजयजी ने कहा परमात्मा गुरु अर्थात साधु के दर्शन पुण्य से प्राप्त होते है। दर्शन मात्र से वांछित फलों की प्राप्ति होती है। पुण्य जब बढ़ता है तो पराए भी अपने होते हैं और पापोदय के कारण अपने भी पराए हो जाते हैं। मुनि प्रशमसेन विजयजी ने कहा संसार में दो प्रकार के लोग हैं- भोजनानंदी व भजनानंदी। भजनानंदी सिर्फ अपने आत्मभाव एवं हित का ही चिंतन करता है। भोजनानंदी पुदगल प्रेमी होता है, उसे सिर्फ नश्वर में ही मोह होता है।

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