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न धड़कन थी, न बीपी आ रहा था, एक घंटे आईसीयू में रखा, तब बची जान

3 वर्ष पहले
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डिलीवरी में लापरवाही से शिशु की जन्म देते समय महिला का गर्भाशय निकलकर बाहर आ गया। आगर जिला अस्पताल से महिला को इसी हालत में चरक अस्पताल रैफर कर दिया गया। उसे मरणासन्न हालत में चरक अस्पताल ले जाया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार अस्पताल पहुंचते वक्त महिला की दिल की धड़कन करीब शून्य हो चुकी थी, बीपी भी नहीं आ रहा था। वह अंतिम सांस की हालत में पहुंची थी जिसे दो घंटे की मशक्कत के बाद बचाया गया। इस प्रकार के मामलों में बेहद कम रिकवरी होती है। रीना पति ईश्वर निवासी आगर ने मंगलवार को आगर जिला अस्पताल में नार्मल डिलीवरी से दोपहर 12.55 बजे बेटी को जन्म दिया लेकिन डिलीवरी के वक्त गर्भाशय से आंवल नहीं छूटने के कारण वह बाहर आ गया, जिसके चलते महिला शॉक में चली गई, इसके बाद संबंधित महिला चिकित्सक ने उसे चरक अस्पताल रैफर कर दिया। शाम 4.30 बजे महिला को चरक अस्पताल लाया गया। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ.संगीता पल्सानिया ने बताया अस्पताल पहुंचने पर महिला की हार्ट बीट और बीपी जीरो आ रहा था। इस कारण विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ.सीएम पुराणिक को बुलाया गया। डॉ.पुराणिक ने करीब एक घंटे तक उसे आईसीयू में उपचार दिया। एक घंटे बाद महिला की पल्स और बीपी नार्मल आ गया। हेवी डोज के बाद उसे नार्मल किया गया। इसके बाद उसे ओटी में लिया गय, जहां उसका गर्भाशय अंदर किया गया। 6.30 बजे महिला को आईसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।

हार्ट पंपिंग व अन्य प्रक्रियाओं से लौटी महिला की धड़कन

डिलीवरी के वक्त लापरवाही

अंदर गर्भाशय उल्टा होकर बाहर आ गया था तो हाथों-हाथ ही अंदर कर देने पर महिला को जिंदगी और मौत के बीच जूझना नहीं पड़ता लेकिन चिकित्सकों ने इसे अंदर करने की बजाए रैफर कर दिया। जिस वजह से महिला की हालत इतनी गंभीर हो गई। निश्चतेना विशेषज्ञ डॉ.वायके चौहान भी वहीं बने रहे। डॉ.संगीता पल्सानिया, चरक अस्पताल

पल्स कम, बीपी नहीं आ रहा था

महिला की पल्स काफी कम हो गई थी और उसका बीपी भी नहीं आ रहा था। इस कारण उसे जीवन रक्षक दवाइयों का हाईडोज दिया गया। काफी देर तक हार्ट पंपिंग व अन्य प्रक्रियाओं से उसकी धड़कन वापस लौटी। हम लोगों ने तो उम्मीद छोड़ दी थी। भगवान की कृपा से ही उसे दूसरा जीवन मिला। डॉ.सीएम पुराणिक, विशेषज्ञ चिकित्सक

जेडी से करेंगे शिकायत

महिला का उपचार यदि हाथों-हाथ हो जाता तो उसकी जान पर नहीं बनती। चिकित्सको की लापरवाही के कारण वह मरणासन्न हालत में आ गई। आगर से चरक तक पहुंचने में चार घंटे का समय लगा। एेसी हालत में एक-एक मिनट कीमती होता है। संबंधित मरीज की जान जा सकती है। इसकी शिकायत जेडी से की जाएगी। डॉ.राजू निदारिया, सीएमएचओ

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