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मिल मजदूरों ने 1986 में रेल रोको आंदोलन किया था, कोर्ट से 32 साल बाद आया गिरफ्तारी वारंट

3 वर्ष पहले
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सन 1986 में मिल मजदूरों द्वारा किए रेल रोको आंदोलन में शामिल आंदोलनकारियों के खिलाफ रेलवे ट्रैक जाम करने के आरोपी के तौर पर 32 साल बाद रेलवे न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह आंदोलन राज्यसभा सदस्य सत्यनारायण जटिया के नेतृत्व में हुआ था, जिनका वारंट जारी हुआ है वे अधिकांश भाजपा के कार्यकर्ता हैं। जीआरपी द्वारा इन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जाएगा।

जीआरपी ने बताया प्रकरण क्रमांक 6930/897030 में रेल रोको आंदोलन के दौरान ट्रैक पर चक्काजाम करने को लेकर 20 लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ है। मामले में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जाएगा। मामले में आरोपी भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के जिला संयोजक श्रीराम सांखला ने बताया आंदोलन के दौरान 300 लोगों ने गिरफ्तारियां दी थी। बाद में 60 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। 40 आंदोलनकारियों के प्रकरण में जुर्माना या बरी का निर्णय हो चुका है। राज्यसभा सदस्य डॉ.सत्यनारायण जटिया प्रमुख नेता थे, उन्हीं के नेतृत्व में आंदोलन हुआ था। डॉ.जटिया ने बताया उनका नाम इस प्रकरण से विड्रा हो चुका है। कोर्ट द्वारा जिन 40 लोगों पर जुर्माना या बरी किया, उनमें वे भी शामिल थे।

तब राजनीति के केंद्र में थे मजदूर

राज्यसभा सदस्य सत्यनारायण जटिया के नेतृत्व में 1986 में मिल मजदूरों का एक बड़ा आंदोलन हुआ था। इसमें 3 हजार से ज्यादा मजदूर और उनके परिजनों ने हिस्सा लिया था। अपनी मांगें मनवाने के लिए रेलवे ट्रैक पर बैठकर जाम लगाया था। रेलवे पुलिस ने कार्रवाई कर 300 लोगों को गिरफ्तार किया था। शहर के 30 हजार लोग मिल मजदूर थे। इस दौर में मिल मजदूर राजनीति का केंद्र होते थे। डॉ. जटिया प्रमुख मजदूर नेता थे। बताया जाता है यहीं से उनकी राजनीति की शुरुआत हुई थी। हालांकि उनके सांसद, श्रममंत्री और अब राज्यसभा सदस्य बनने के बावजूद मजदूरों की दशा नहीं सुधरी, अपितु एक-एक कर शहर की सभी मिलें बंद हो गई।

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